माँ कामाख्या शक्तिपीठ चालीसा
माँ कामाख्या शक्तिपीठ चालीसा
गुरु गोविंद का आसरा, तात मात सिर नाय ।
कामाख्या मां शारदा, सिद्ध सकल हो जाय ॥
विद्व सिद्ध संतन गुणी, तपसी तारणहार ।
हाथ जोड़ “लहरी" करे, वंदन बारम्बार ॥ चौपाई
गौरी गणपति प्रथम मनाऊं ।
सकल कामना सिद्ध कराऊं ॥
जगजननी कामाख्या माता I
शिवशक्ति मेरी भाग्यविधाता ॥
लगन लगी कुछ भी ना जानूं ।
कैसे तेरा गुणगान बखानूं ॥
दस विद्या का अंश मात्र भी ।
जानूं नहीं ग्रह गौचरात्र भी ॥
शुभ और अशुभ घड़ी तू जाने ।
बैठ गया हूं तुझको रिझाने ॥
बालक बुद्धि जान निहारो ।
सिर पे रख दो हाथ तुम्हारो ॥
परमेश्वरी सम्पूर्ण आराध्या
निकसी अंतस अर्चन आध्या ॥
ब्रह्मा विष्णु शिव हे माते ।
काम क्षेत्र तेरा ध्यान लगाते ॥
मुनिवर श्रेष्ठ वशिष्ठ सिद्ध हैं ।
भांतिब्रह्म जन जन प्रसिद्ध है ।
हार के आया त्रिपुर भैरवी ।
कौन करे मां मेरी पैरवी ॥
निपट अकेला निपट अनाड़ी ।
चल जाए मेरी भी गाड़ी ॥
एक बार मोहि आन निहारो ।
कामाख्या मेरी मात उबारो ॥
मनो कामना पूरी कर दो । ।
शरण पड़ा हूं माता वर दो ॥
पूरब दिशि मां तारा दर्शन ।
अगनकण षोडशी सुदर्शन ॥
धूमावती दक्षिण में दयाला ।
नैऋत्यां भज भैरवी माला
भुवनेश्वरी पश्चिम करे रक्षा ।
छिन्नमस्ता वायब्य सुरक्षा 11
बगलामुखी उत्तर दिशि शोभा ।
त्रिपुरसुंदरी दे मति बोधा ॥
ऊर्ध्व उज्वला मातंगिनी मां ।
सर्व रक्षिका क्लीं काली मां ॥
दसों दिशा में तेरी ज्योति ।
रोम रोम आराधना होती जय
जयकारे नभ गूंजे मां ।
अन धन खुशियां सब लूटे मां ॥
आशा पूरण आज करो मां ।
संकट काटो कष्ट हरो मां ॥
स्वीकारो मेरी मानस पूजा ।
नैम धरम जानूं नहीं दूजा ॥
पावन दिन वैशाख तृतीया ।
जाप करै सम्मुख रख दीया ॥
परम् पिता शिवशंकर कहते ।
निश्छल मन हो आंसू बहते ॥
ऐसी करो पुकार सुने मां ।
जो भी वांछित वर दे दे मां ॥
यही धारणा लेकर बैठा पूजा
प्रार्थना करने बैठा डाकिन,
शाकिन पास ना फटकै ।
प्रेतादिक सबभागे बचकै 11
निर्भय हो कर तुम्हें मनाऊं ।
नित्य नए गुणगान सुनाऊं ॥
सभी सिद्धियां देने वाली वाली ।
बिगड़े भाग्य बनाने वाली ॥
अखिलाराध्या भीम लोचना ।
दीनन दुःख दारिद्र मोचना ॥
रक्तबीज महिसासुर मर्दिनि
काम रूप मां नित्य वंदिनि ॥
नव ग्रहादि अरु दिग् दिग्पाला ।
क्षेत्रपाल हो सब रखवाला 11
बावन भैरव चौसठ योगिन ।
चले नहीं मां तब आज्ञा बिन ॥
अप्सरायक्ष यक्षिणी शीश नवावै ।
तेरे लाल को नहीं सतावै ॥
ब्रह्मदैत्य वेताल कान भरै ना कोई मंथरा ॥
सत कोटि ब्रह्मांड हैं तेरे ।
रूप तेरे उनमें बहुतेरे
ममता का आंचल फैलाओ ।
लाल को अपने गले लगाओ ॥
दुर्बल अति कमजोर हूं मैया ।
बन जाऊं तेरो कुंवरकन्हैया ॥
कठिन कौनसो काम तुझे मां ।
जो ना तुम कर सको उसे मां ॥
" लहरी" लज्जा हाथ तेरे मां ।
निश्चित जागे भाग्य मेरे मां ॥
दोहा
डम डम डम डमरू बजे, अन धन बरसै ठाठ ।
मन वांछित माया मिले, पाठ हों एक सौ आठ ॥
कामाख्या मां शारदा, सिद्ध सकल हो जाय ॥
विद्व सिद्ध संतन गुणी, तपसी तारणहार ।
हाथ जोड़ “लहरी" करे, वंदन बारम्बार ॥ चौपाई
गौरी गणपति प्रथम मनाऊं ।
सकल कामना सिद्ध कराऊं ॥
जगजननी कामाख्या माता I
शिवशक्ति मेरी भाग्यविधाता ॥
लगन लगी कुछ भी ना जानूं ।
कैसे तेरा गुणगान बखानूं ॥
दस विद्या का अंश मात्र भी ।
जानूं नहीं ग्रह गौचरात्र भी ॥
शुभ और अशुभ घड़ी तू जाने ।
बैठ गया हूं तुझको रिझाने ॥
बालक बुद्धि जान निहारो ।
सिर पे रख दो हाथ तुम्हारो ॥
परमेश्वरी सम्पूर्ण आराध्या
निकसी अंतस अर्चन आध्या ॥
ब्रह्मा विष्णु शिव हे माते ।
काम क्षेत्र तेरा ध्यान लगाते ॥
मुनिवर श्रेष्ठ वशिष्ठ सिद्ध हैं ।
भांतिब्रह्म जन जन प्रसिद्ध है ।
हार के आया त्रिपुर भैरवी ।
कौन करे मां मेरी पैरवी ॥
निपट अकेला निपट अनाड़ी ।
चल जाए मेरी भी गाड़ी ॥
एक बार मोहि आन निहारो ।
कामाख्या मेरी मात उबारो ॥
मनो कामना पूरी कर दो । ।
शरण पड़ा हूं माता वर दो ॥
पूरब दिशि मां तारा दर्शन ।
अगनकण षोडशी सुदर्शन ॥
धूमावती दक्षिण में दयाला ।
नैऋत्यां भज भैरवी माला
भुवनेश्वरी पश्चिम करे रक्षा ।
छिन्नमस्ता वायब्य सुरक्षा 11
बगलामुखी उत्तर दिशि शोभा ।
त्रिपुरसुंदरी दे मति बोधा ॥
ऊर्ध्व उज्वला मातंगिनी मां ।
सर्व रक्षिका क्लीं काली मां ॥
दसों दिशा में तेरी ज्योति ।
रोम रोम आराधना होती जय
जयकारे नभ गूंजे मां ।
अन धन खुशियां सब लूटे मां ॥
आशा पूरण आज करो मां ।
संकट काटो कष्ट हरो मां ॥
स्वीकारो मेरी मानस पूजा ।
नैम धरम जानूं नहीं दूजा ॥
पावन दिन वैशाख तृतीया ।
जाप करै सम्मुख रख दीया ॥
परम् पिता शिवशंकर कहते ।
निश्छल मन हो आंसू बहते ॥
ऐसी करो पुकार सुने मां ।
जो भी वांछित वर दे दे मां ॥
यही धारणा लेकर बैठा पूजा
प्रार्थना करने बैठा डाकिन,
शाकिन पास ना फटकै ।
प्रेतादिक सबभागे बचकै 11
निर्भय हो कर तुम्हें मनाऊं ।
नित्य नए गुणगान सुनाऊं ॥
सभी सिद्धियां देने वाली वाली ।
बिगड़े भाग्य बनाने वाली ॥
अखिलाराध्या भीम लोचना ।
दीनन दुःख दारिद्र मोचना ॥
रक्तबीज महिसासुर मर्दिनि
काम रूप मां नित्य वंदिनि ॥
नव ग्रहादि अरु दिग् दिग्पाला ।
क्षेत्रपाल हो सब रखवाला 11
बावन भैरव चौसठ योगिन ।
चले नहीं मां तब आज्ञा बिन ॥
अप्सरायक्ष यक्षिणी शीश नवावै ।
तेरे लाल को नहीं सतावै ॥
ब्रह्मदैत्य वेताल कान भरै ना कोई मंथरा ॥
सत कोटि ब्रह्मांड हैं तेरे ।
रूप तेरे उनमें बहुतेरे
ममता का आंचल फैलाओ ।
लाल को अपने गले लगाओ ॥
दुर्बल अति कमजोर हूं मैया ।
बन जाऊं तेरो कुंवरकन्हैया ॥
कठिन कौनसो काम तुझे मां ।
जो ना तुम कर सको उसे मां ॥
" लहरी" लज्जा हाथ तेरे मां ।
निश्चित जागे भाग्य मेरे मां ॥
दोहा
डम डम डम डमरू बजे, अन धन बरसै ठाठ ।
मन वांछित माया मिले, पाठ हों एक सौ आठ ॥
Maa Kamakhya Shaktipeeth Chalisa | माँ कामाख्या शक्तिपीठ चालीसा | Uma Lahari | CS Lahari
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Song: Maa Kamakhya Shaktipeeth Chalisa
Singer: Uma Lahari
Lyrics & Composition: CS Lahari
Music: Nizam Khan
Video: Bhakti vandana
Category: Mata Bhajan
Producer: Ramit Mathur
Label: Yuki
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राम जी ने एक ही क्षण में एक बार तो राधा बनकर देखो भजन
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Admin - Saroj Jangir
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