मन ममता को मारिये कर कर ब्रह्मविचार भजन
मन ममता को मारिये कर कर ब्रह्मविचार भजन
बरसाना में होली खेले सा,
राधा संग बिहारी,
राधा संग बिहारी खेले,
खेले सखियाँ सारी जी।
उड़ रया गुलाल गगन में,
छाई मस्ती भारी जी,
फागण आयो प्रेम बरसाओ,
बाजे मुरली प्यारी जी,
बरसाना में होली खेले सा,
राधा संग बिहारी।
लाल गुलाबी रंग उड़ावे,
भीजे बृज की नारी जी,
हँस हँस छेड़े राधा रानी,
नाचे श्याम मुरारी जी,
बरसाना में होली खेले सा,
राधा संग बिहारी।
ग्वाल बाल सब नाचन लाग्या,
छाई खुशियाँ न्यारी जी,
केसर घोल पिचकारी भरके,
मारे श्याम मुरारी जी,
बरसाना में होली खेले सा,
राधा संग बिहारी।
महावीर गावे फागण में जी,
राधा श्याम रो नाम जी,
प्रेम रंग में भीजयो मन यो,
झूमे ब्रज रो धाम जी,
बरसाना में होली खेले सा,
राधा संग बिहारी।
बरसाना में होली खेले सा,
राधा संग बिहारी,
राधा संग बिहारी खेले,
खेले सखियाँ सारी जी।
राधा संग बिहारी,
राधा संग बिहारी खेले,
खेले सखियाँ सारी जी।
उड़ रया गुलाल गगन में,
छाई मस्ती भारी जी,
फागण आयो प्रेम बरसाओ,
बाजे मुरली प्यारी जी,
बरसाना में होली खेले सा,
राधा संग बिहारी।
लाल गुलाबी रंग उड़ावे,
भीजे बृज की नारी जी,
हँस हँस छेड़े राधा रानी,
नाचे श्याम मुरारी जी,
बरसाना में होली खेले सा,
राधा संग बिहारी।
ग्वाल बाल सब नाचन लाग्या,
छाई खुशियाँ न्यारी जी,
केसर घोल पिचकारी भरके,
मारे श्याम मुरारी जी,
बरसाना में होली खेले सा,
राधा संग बिहारी।
महावीर गावे फागण में जी,
राधा श्याम रो नाम जी,
प्रेम रंग में भीजयो मन यो,
झूमे ब्रज रो धाम जी,
बरसाना में होली खेले सा,
राधा संग बिहारी।
बरसाना में होली खेले सा,
राधा संग बिहारी,
राधा संग बिहारी खेले,
खेले सखियाँ सारी जी।
मन_ममता_को_मारिये_कर-कर_ब्रह्मविचार || #हेली_भजन || समुन्द्र चेलासरी || Samunder Chelasari
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साधक अपने शरीर को दीपक बना देना चाहता है, प्राणों का तेल डालकर परमात्मा के दर्शन पाने को व्याकुल है। मन की ममता को त्यागकर वह निरंतर ब्रह्म का चिंतन करता है, भवसागर को पार करने हेतु नाम की नाव चढ़ाता है। धर्म कर्म भक्ति शब्द सबको पार करने वाले हैं, पर भ्रम और आत्मतत्त्व को न जानने से ही हानि होती है। सतगुरु के सान्निध्य में कुलमालाएं मिटती हैं, संतों को कभी हानि नहीं छूती।
ब्रह्म परम सत्य है, जो भवभ्रम को हर लेता है और हृदय को शांति से भर देता है। सतगुरु उसका जीवंत स्वरूप हैं, उनके संग आत्मा का भेद खुलता है और ममता का बंधन टूट जाता है। जो साधक शब्द ग्रहण कर नाम में लीन हो जाता है, वह संसार के जाल से मुक्त होकर परम पद को प्राप्त करता है।
ब्रह्म परम सत्य है, जो भवभ्रम को हर लेता है और हृदय को शांति से भर देता है। सतगुरु उसका जीवंत स्वरूप हैं, उनके संग आत्मा का भेद खुलता है और ममता का बंधन टूट जाता है। जो साधक शब्द ग्रहण कर नाम में लीन हो जाता है, वह संसार के जाल से मुक्त होकर परम पद को प्राप्त करता है।
Man Mamta Ko Mariye Kar Kar Birm Vichar - - Hali bhajan
Singer -- Samunder Chelasary
Wadak -- Prem Bawra Rawtsar
Singer -- Samunder Chelasary
Wadak -- Prem Bawra Rawtsar
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Author - Saroj Jangir
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