गौरा को ब्याहने देखो आये हैं भोलेनाथ जी

गौरा को ब्याहने देखो आये हैं भोलेनाथ जी

कैसा ये अनोखा कर के,
आये हैं श्रृंगार जी,
सर्पों का सेहरा,
बिछु का कुंडल,
आये हैं नंदी पे सवार जी,
बाबा जी मेरे बाबा जी,
ओ भोले बाबा जी,
मेरे बाबा जी।

गौरा को ब्याहने देखो,
आये हैं भोलेनाथ जी,
संग लेकर जायेंगे,
कैलाश भोलेनाथ जी।

ब्रह्मा विष्णु आये हैं,
देवों को संग लाये हैं,
ऋषि मुनियों संग नारद,
झूमे नाच गाये हैं,
तन पे भस्म है,
मुंडो की माला है,
अजब भोले की बारात जी,
ढोल मंजीरा भूत बजाये,
नाचे हैं शंभुनाथ जी।

गौरा को ब्याहने देखो,
आये हैं भोलेनाथ जी,
संग लेकर जायेंगे,
कैलाश भोलेनाथ जी।

नैना में समझाया जी,
बाबा मरघट वासी जी,
तू है महलों की रानी गौरा,
कैसे बनेगी तू दासी जी,
गौरा बोली जन्मों का नाता है,
लगन ऐसी मोहे लागी जी,
भोले के ध्यान में रहते मैं तो,
भोले बिन हूं आधी जी।

गौरा को ब्याहके चले,
बाबा भोलेनाथ जी,
तीनो लोक में जय जयकार है,
गौरा शंभुनाथ की।

कभी योगी कभी जोगी,
बाबा के रूप अनेक जी,
गौर के मन को भाते हैं बाबा,
हुये हैं अब दोनों एक जी,
बाबा जी मेरे बाबा जी,
ओ भोले बाबा जी,
मेरे बाबा जी।

गौरा को ब्याहके चले,
बाबा भोलेनाथ जी,
तीनो लोक में जय जयकार है,
गौरा शंभुनाथ की।
कैसा ये अनोखा कर के,
आये हैं श्रृंगार जी,
सर्पों का सेहरा,
बिछु का कुंडल,
आये हैं नंदी पे सवार जी,
बाबा जी मेरे बाबा जी,
ओ भोले बाबा जी,
मेरे बाबा जी।


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