बाबा का दरबार लगै सरी मंगल शनिवार भजन

बाबा का दरबार लगै सरी मंगल शनिवार भजन

बाबा का दरबार लगे स री,
मंगल और शनिवार।

बालाजी की जोत जगे स,
कटते रोग पुराने री, कटते रोग पुराने री,
एक दरख्वास्त लगे चरणां में,
पल में बाबा आणे री, पल में बाबा आणे री,
पल में रोग कटे स री,
मंगल और शनिवार।

छोटे~छोटे दो लड्डू,
खाए तो पेशी आवे स, खाए तो पेशी आवे स,
मार~मार के सोटे बाबा,
घेर जोत पर ल्यावे स, घेर जोत पर ल्यावे स,
ओपरा नहीं डटे स री,
मंगल और शनिवार।

दरबारां में जोत जगे स,
पहरे पर हनुमान खड़े, पहरे पर हनुमान खड़े,
धरया लंगोटा बालाजी का,
दिखें संत भगवान खड़े, दिखें संत भगवान खड़े,
सोए भाग जगें स री,
मंगल और शनिवार।

बाले भक्त जोत पर बैठे,
सिर पर हाथ मुरारी का, सिर पर हाथ मुरारी का,
महराणे में झंडा गड़ रह्या,
बाबा संकटहारी का, बाबा संकटहारी का,
गुहणिया राम रटे स री,
मंगल और शनिवार।

बाबा का दरबार लगे स री,
मंगल और शनिवार।



बाबा का दरबार लगे सै री मंगल और शनिवार || Narender Kaushik || Latest Bala Ji Bhajan |Satpal Rohatiya

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Singer:- Narender Kaushik
Writer:- Ashok Guniya
Music:- Natraz Studio
Editor:- Krishan Kumar
आशीर्वाद :- सिद्ध बाबा मोनी नाथ महाराज जी
 
Saroj Jangir Author Admin - Saroj Jangir

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