जीव थारे कोई काम नहीं आयो भजन

जीव थारे कोई काम नहीं आयो भजन

जीव थारे कोई काम नहीं आयो,
भजन बिना रीतो जनम गमायो।।

भाई~बंदु थारा कुटुम~कबीला,
थांने घणो हँसावे,
मरती वेल्या थांने बायर काढ्यो,
घड़ी~पलक नहीं जायो,
जीव थारे कोई काम नहीं आयो,
भजन बिना रीतो जनम गमायो।।

पेट पकड़ थारी माता रोवै,
भुजा पकड़ थारो भाई,
तेरह~दिन थारी तिरिया रोवै,
फेर घणो हरसाई,
जीव थारे कोई काम नहीं आयो,
भजन बिना रीतो जनम गमायो।।

आगे जाय भायो पाछे नाल्यो,
कई~कई लारा लायो,
खोटो पैसो फूटी हांडी,
लाडू बगल में लायो,
जीव थारे कोई काम नहीं आयो,
भजन बिना रीतो जनम गमायो।।

आला~लीला बास कटाया,
जंगल~चवरी रचाई,
केवै कबीरा सुण भाई साधू,
फेर जनम नहीं पायो,
जीव थारे कोई काम नहीं आयो,
भजन बिना रीतो जनम गमायो।।

जीव थारे कोई काम नहीं आयो,
भजन बिना रीतो जनम गमायो।।



नये अंदाज मे।। भजन बिना रितो जनम।। स्वर लादू पूरी ।। मा दुर्गा साउंड 8955980021

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Saroj Jangir Author Admin - Saroj Jangir

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