चलो रे खाटू के दरबार जहां विराजे शीश का दानी भजन

चलो रे खाटू के दरबार जहां विराजे शीश का दानी भजन

चलो रे खाटू के दरबार,
जहां विराजे शीश का दानी,
मेरा लखदातार।

शरण बाबा की आ जाओ,
जो चाहो वो सब कुछ पाओ,
चरण में शीश नवा जाओ,
दया बाबा की पा जाओ,
कलियुग का है देव निराला,
भर देगा भण्डार।

वहां हारे का सहारा है,
सांवरा सेठ हमारा है,
डूबते हुए को तारा है,
खिवैया वही हमारा है,
हिचकोले खाती नैया को,
करदे परली पार।

भगत की आंखों को पढ़ता,
नहीं कहना कुछ भी पड़ता,
बिना बोले दुखड़े हरता,
बिना मांगे झोली भरता,
हर्ष कहे दुनिया में दूजी,
ना ऐसी सरकार।

चलो रे खाटू के दरबार,
जहां विराजे शीश का दानी,
मेरा लखदातार,
चलो रे खाटू के दरबार,
जहां विराजे शीश का दानी,
मेरा लखदातार।


Jahan viraje sheesh ka dani, mera Lakhdatar, Chalo re Khatu ke darbar

भजन रचैता - श्रीविनोद जी अग्रवाल (कोलकाता)
स्वर - सुश्री स्वाति जी अग्रवाल (कोलकाता)
 
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