धीरज राख रे टाबरिया तेरा कष्ट मिटास्यूं भजन
धीरज राख रे टाबरिया तेरा कष्ट मिटास्यूं भजन
धीरज राख रे टाबरिया,तेरा कष्ट मिटास्यूं रे,
धीरज राख रे,
थोड़ो सो धीरज राख ले ना।
त्रेताजुग मं जनम लियो जद,
राजा राम कुहायो हो,
इक दिण़ अैस्यो बगत फिरयो तब,
बन बन मं भटकायो हो,
पाछा जद मेरा दिन फिरग्या,
राज वो पायो रे।
द्वापर जुग मं कृष्ण रूप धर,
पाण्डव कुळ नै बचायो हो,
उळ्टा सीधा खेल रचाकर,
महाभारत रचवायो हो,
अपणै बंश की,
सत् की खातिर,
नाश करायो रे।
मेरी करणि मैं भी भोग्यो,
टाबरिया थूं जाण ले,
थूं तो बस एक प्राणी मात्र है,
या ई मन मं ठाण ले,
करणी करी सो भोगणी पड़सी,
मतो बतायो रे।
तिरलोकी रो नाथ कुहावूं,
सारै जग पै राज मेरो,
वक्त बडो बळवान है भाया,
जैं पै ना कोई जोर मेरो,
फिर भी सैं नै धीर बंधावूं,
जो है प्यारो रे।
चायै जितणो वक्त बुरो व्है,
शिव इतणो मैं देवूं रे,
श्याम बहादुर व्है चायै जैसो,
भूखो ना रहने देवूं रे,
घनश्याम गाडियो कवै यो सैं को,
साथ निभायो रे।
धीरज राख रे टाबरिया,
तेरा कष्ट मिटास्यूं रे,
धीरज राख रे,
थोड़ो सो धीरज राख ले ना।
Dhiraj Raakh Re Taabariya Tera Kasht Mitasyu - Rajasthani Shyam Baba Dhamal - Sajjan Ji Singhania
ज़िन्दगी के भारी–भारी दिनों में ये बात सुनाई देती है कि धीरज संभालकर रखना—जो भी तकलीफ है, हल चल रहा है, बस थोड़ा सा सब्र और रख लो। टाबरिया से बात ऐसी होती है मानो कोई बड़ा भाई या परिवार का सहारा बैठकर समझा रहा हो: “तू तो बस एक प्राणी है, ज़िंदगी के रास्ते कभी ऊँचे‑नीचे होते हैं, बस अंदर से यही ठान ले कि जो कर्म हुआ, उसका फल भोगकर भी मैं खड़ा रहूँगा।” इस भाव में डर घटता है और लगना शुरू होता है कि अकेले नहीं, कोई तो इस सब का हिसाब रख रहा है।
राम के समय बन‑बन भटकना और फिर राज का वापस आना, फिर द्वापर में कृष्ण बनकर पांडवों की मदद और महाभारत की लड़ाई—ये सब कहानियाँ सुनाकर यही समझाया जाता है कि भगवान खुद भी कर्म‑क्लेश भोगते हैं, तो फिर इंसान को भी डरना क्यों है। तीन लोकों का स्वामी यह भी कहता है कि समय सबसे बड़ा बलवान है, उसके आगे कोई ज़ोर नहीं, लेकिन फिर भी अपने प्रिय के लिए थोड़ा थाम भी रखता है। जितना भी बुरा वक्त आए, उससे थोड़ा ज़्यादा शान्ति और आशीर्वाद दे देता है, ताकि भूखा न रह जाए, टूट ही न जाए दिल। आप सभी पर इश्वर की कृपा बनी रहे। जय श्री राम और जय श्री कृष्ण जी की।
यह भजन भी देखिये
दिल का सुनाऊं किसे हाल मेरे सांवरे
राधाकृष्ण प्राण मोर युगल किशोर
वृंदावन के ओ सरकार तुमसे चलता भजन