मेरा मिलन करादो श्री राम से राम भजन
मेरा मिलन करादो श्री राम से राम भजन
सागर पार से सीता का समाचार लाने वाले,
हनुमान जी तुम, राम जी के काम आने वाले,
मैंने बोला है,
मैंने बोला है, प्रसाद तेरे नाम से,
मेरा मिलन करा दो श्रीराम से।।
हे राम-सिया के प्यारे, इक जोगन तुम्हें पुकारे,
विश्वास है मेरा, प्रियतम मिल जाएगा तुम्हारे द्वारे,
संकटमोचन, संकट हर दो, मंगल के दिल मंगल कर दो,
संकटमोचन, संकट हर दो, मंगल के दिल मंगल कर दो,
खाली हाथ न लौटूँगा मैं तेरे धाम से,
खाली हाथ न लौटूँगा मैं तेरे धाम से,
मेरा मिलन करा दो श्रीराम से,
मेरा मिलन करा दो श्रीराम से।।
वो माने या न माने, मैंने मान लिया उसे अपना,
वही मेरा जीवन-साथी, वही मेरे प्राण का सपना,
बिछड़े मीत मिलाने वाले, सबका काज बनाने वाले,
बिछड़े मीत मिलाने वाले, सबका काज बनाने वाले,
बड़ी आस लेके आया हूँ मैं राम से,
बड़ी आस लेके आया हूँ मैं राम से,
मेरा मिलन करा दो श्रीराम से,
मेरा मिलन करा दो श्रीराम से।।
मंगलमूर्ति मारुति नंदन, सकल मूल निकंदन,
दुनिया के नायक रघुनायक, दशरथ-कौशल्या के नंदन,
मंगलमूर्ति मारुति नंदन, सकल मूल निकंदन,
दुनिया के नायक रघुनायक, दशरथ-कौशल्या के नंदन,
चारों जग प्रताप तुम्हारा, है प्रसिद्ध जगत उजियारा,
चारों जग प्रताप तुम्हारा, है प्रसिद्ध जगत उजियारा,
गुरु बृजमोहन,
गुरु बृजमोहन, देवेंद्र भी लग जाए काम से,
मेरा मिलन करा दो श्रीराम से,
मेरा मिलन करा दो श्रीराम से।।
सागर पार से सीता का समाचार लाने वाले,
हनुमान जी तुम, राम जी के काम आने वाले,
मैंने बोला है,
मैंने बोला है, प्रसाद तेरे नाम से,
मेरा मिलन करा दो श्रीराम से।।
हनुमान जी तुम, राम जी के काम आने वाले,
मैंने बोला है,
मैंने बोला है, प्रसाद तेरे नाम से,
मेरा मिलन करा दो श्रीराम से।।
हे राम-सिया के प्यारे, इक जोगन तुम्हें पुकारे,
विश्वास है मेरा, प्रियतम मिल जाएगा तुम्हारे द्वारे,
संकटमोचन, संकट हर दो, मंगल के दिल मंगल कर दो,
संकटमोचन, संकट हर दो, मंगल के दिल मंगल कर दो,
खाली हाथ न लौटूँगा मैं तेरे धाम से,
खाली हाथ न लौटूँगा मैं तेरे धाम से,
मेरा मिलन करा दो श्रीराम से,
मेरा मिलन करा दो श्रीराम से।।
वो माने या न माने, मैंने मान लिया उसे अपना,
वही मेरा जीवन-साथी, वही मेरे प्राण का सपना,
बिछड़े मीत मिलाने वाले, सबका काज बनाने वाले,
बिछड़े मीत मिलाने वाले, सबका काज बनाने वाले,
बड़ी आस लेके आया हूँ मैं राम से,
बड़ी आस लेके आया हूँ मैं राम से,
मेरा मिलन करा दो श्रीराम से,
मेरा मिलन करा दो श्रीराम से।।
मंगलमूर्ति मारुति नंदन, सकल मूल निकंदन,
दुनिया के नायक रघुनायक, दशरथ-कौशल्या के नंदन,
मंगलमूर्ति मारुति नंदन, सकल मूल निकंदन,
दुनिया के नायक रघुनायक, दशरथ-कौशल्या के नंदन,
चारों जग प्रताप तुम्हारा, है प्रसिद्ध जगत उजियारा,
चारों जग प्रताप तुम्हारा, है प्रसिद्ध जगत उजियारा,
गुरु बृजमोहन,
गुरु बृजमोहन, देवेंद्र भी लग जाए काम से,
मेरा मिलन करा दो श्रीराम से,
मेरा मिलन करा दो श्रीराम से।।
सागर पार से सीता का समाचार लाने वाले,
हनुमान जी तुम, राम जी के काम आने वाले,
मैंने बोला है,
मैंने बोला है, प्रसाद तेरे नाम से,
मेरा मिलन करा दो श्रीराम से।।
मेरा मिलन करादो श्री राम से - Mera Milan Karado Shree Ram Se - Devendra Pathak Ji
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► Album - Mora Milan Kara Do Shri Ram Se
► Song - Mora Milan Kara Do Shri Ram Se
► Singer - Devendra Pathak
► Music - Kailash kumar Shrivastav
► Lyrics - Traditional
➤ Label - Vianet Media
► Song - Mora Milan Kara Do Shri Ram Se
► Singer - Devendra Pathak
► Music - Kailash kumar Shrivastav
► Lyrics - Traditional
➤ Label - Vianet Media
हनुमान जी के प्रति अटूट विश्वास और श्रीराम के दर्शन की तीव्र अभिलाषा इस भक्ति-भाव में सहज रूप से झलकती है। पवनपुत्र केवल बल और पराक्रम के प्रतीक नहीं, बल्कि भक्त और भगवान के बीच प्रेम का दिव्य सेतु भी हैं। जिस प्रकार उन्होंने माता सीता तक श्रीराम का संदेश पहुँचाया और असंभव प्रतीत होने वाले कार्य को अपनी भक्ति और समर्पण से संभव बनाया, उसी प्रकार वे आज भी श्रद्धालुओं को प्रभु के चरणों तक पहुँचने का मार्ग दिखाते हैं। उनके द्वार पर आने वाला भक्त अपने मन की पीड़ा, आशा और विश्वास लेकर उपस्थित होता है, क्योंकि उसे पूर्ण भरोसा होता है कि सच्ची पुकार कभी व्यर्थ नहीं जाती।
श्रीराम से मिलने की इच्छा केवल बाहरी दर्शन की नहीं, बल्कि हृदय में उनके प्रेम, करुणा और मर्यादा को अनुभव करने की आकांक्षा है। जब मन निष्कपट होकर हनुमान जी का स्मरण करता है, तब भीतर के भय, संदेह और निराशा दूर होने लगते हैं। वे भक्त के जीवन में साहस, धैर्य और अटूट श्रद्धा का संचार करते हैं तथा प्रभु तक पहुँचने का सरल मार्ग प्रशस्त करते हैं। सच्ची भक्ति वही है जिसमें विश्वास अडिग हो, समर्पण पूर्ण हो और हृदय में केवल प्रभु के चरणों की चाह हो। जय श्री हनुमान! जय श्रीराम!
श्रीराम से मिलने की इच्छा केवल बाहरी दर्शन की नहीं, बल्कि हृदय में उनके प्रेम, करुणा और मर्यादा को अनुभव करने की आकांक्षा है। जब मन निष्कपट होकर हनुमान जी का स्मरण करता है, तब भीतर के भय, संदेह और निराशा दूर होने लगते हैं। वे भक्त के जीवन में साहस, धैर्य और अटूट श्रद्धा का संचार करते हैं तथा प्रभु तक पहुँचने का सरल मार्ग प्रशस्त करते हैं। सच्ची भक्ति वही है जिसमें विश्वास अडिग हो, समर्पण पूर्ण हो और हृदय में केवल प्रभु के चरणों की चाह हो। जय श्री हनुमान! जय श्रीराम!
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Author - Saroj Jangir
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