कब आओगे गुराजी म्हारे देस कबीर भजन
कब आओगे गुराजी म्हारे देस कबीर भजन
एजी मीरा ने सुन यू कही,और सुन राणा म्हारी बात,
अरे साधु ही मायन बाप हैं,
और संत कुटम परिवार।
कब आओगे गुराजी म्हारे देस,
जोवा थारी बाटडली,
आवन जावन करी गया रे,
करी गया बोल अनेक,
गिनते गिनते घिस गई म्हारी,
ऊंगली यारी रे।
सतगुरू ढूंढन मैं चली रे,
कर जोगनिया भेस,
ढूंढत ढूंढत उमर बीत गए,
धोले हो गए केस।
लिख लिख पाती भेजती रे,
सतगुरू के संदेश,
म्हारी प्रीत लगी सतगुरू से,
और क्या भेजू संदेश।
मीरा ने सतगुरू मिलिया रे,
वर नटवरिया भेस,
कहे तो राणा ले चलू जी,
सतगुरू वाले देस।
कब आओगे गुराजी म्हारे देस || Kab aaoge guru ji mhara desh || Geeta Parag || Kabir Bhajan
मीरा के हृदय में सतगुरु की याद बस गई थी। संसार के रिश्ते-नाते सब पीछे छूट गए। साधु ही माता-पिता लगने लगे और संत ही परिवार। राणा से कहती हैं कि अब घर-बार नहीं, गुरुजी का देश ही अपना देश है।
कब आएंगे गुरुजी, यह बाट देखते-देखते उंगलियां घिस गईं। पाती लिख-लिखकर भेजती रहीं, लेकिन जवाब का इंतजार करते-करते उम्र बीत गई, केस सफेद हो गए। फिर भी प्रीत नहीं छूटी। जोगनिया का भेष बनाकर सतगुरु को ढूंढती चली गई।
जब सतगुरु मिल गए तो सब कुछ बदल गया। नटवरिया रूप में मिले गुरु ने मीरा को अपना बना लिया। अब राणा से कहती हैं – ले चलो मुझे गुरुजी वाले देश। वहाँ का सुख ही असली सुख है। गुरु की कृपा मिलते ही जीवन का सारा दुख मिट जाता है और मन को वह शांति मिलती है जो दुनिया कहीं नहीं दे सकती। आप सभी पर इश्वर की कृपा बनी रहे। जय श्री गुरुदेव जी की।
Main Vocal : Geeta Parag
Chours & Majira : Lila Parag
Timki/Nagari : Singaram Parag
Dholak. : Ajay Tipaniya
Harmonium : Tanu Parag
Violin. : Devnarayan Saroliya
Venue : Lunyakhedi,Kabir aashram
Venue support : Padmshree Prahlad singh Tipaniya
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