खातो खोल कै देख सांवरा चाकर भोत भजन

खातो खोल कै देख सांवरा चाकर भोत पुराणो भजन

 
खातो खोल कै देख सांवरा Khato Khol Ke Dekh Lyrics

चाकर भोत पुराणो हूं,
खातो खोल कै देख सांवरा,
चाकर भोत पुराणो हूं,
लगन चाव लगा कै करूं चाकरी,
तन्नै सैं क्यूं मान्यो हूं।

जद स्यूं होस संभाल्यो हूं मैं,
श्याम तेरो ही चाव चढ्यो,
मैं बाबै रो बाबो मेरो,
मन में ऐसो भाव जग्यो,
भलो बुरो जैसो भी हूं मैं,
तेरो श्याम दीवानो हूं,
लगन लगा कै करूं चाकरी।

मेरो दूजो नहीं आसरो,
एक तेरो ही शरणो है,
सोच समझ कै मेरो फैसलो,
तन्नै ही तो करणो है,
तेरै नाम लिख दी जिंदगानी,
मांग रियो हरजाणो हूं,
लगन लगा कै करूं चाकरी।

थूं मेरै रग रग री जाणै,
मेरो तो हमराज तू ही,
दुखिया दिल रो ताज तू ही है,
प्रेम भरी आवाज तू ही,
कोई दूजो बांच सकै ना,
मैं ऐसो अफसानो हूं,
लगन लगा कै करूं चाकरी।

तेरे दर पे लगाई नजरें,
मैंने सांवरा
मैंने सांवरा मैं तो हुआ बावरा,
तेरे दर पे लगाई नजरें मैंने सांवरा।

मेरे जीवन की किताब का,
पहला पन्ना नाम तेरे,
बिन्नू को संतोष यही है,
कुछ तो आऊं काम तेरे,
थूं मेरी आंख्यां रो दीपक,
मैं तेरो परवानो हूं,
लगन लगा कै करूं चाकरी।

चाकर भोत पुराणो हूं,
खातो खोल कै देख सांवरा,
चाकर भोत पुराणो हूं,
लगन चाव लगा कै करूं चाकरी,
तन्नै सैं क्यूं मान्यो हूं।



खातो खोल कै देख सांवरा, चाकर भोत पुराणो हूं with lyrics|| Khaato khol ke dekh sanwra
खातो खोल कै देख सांवरा, चाकर भोत पुराणो हूं
लगन(चाव) लगा कै करूं चाकरी, तन्नै सैं क्यूं मान्यो हूं

जद स्यूं होस संभाल्यो हूं मैं, श्याम तेरो ही चाव चढ्यो,
मैं बाबै रो, बाबो मेरो, मन में ऐसो भाव जग्यो,
भलो बुरो जैसो भी हूं मैं,तेरो श्याम दीवानो हूं,
लगन लगा कै करूं चाकरी.....(१)

मेरो दूजो नहीं आसरो, एक तेरो ही शरणो है,
सोच समझ कै मेरो फैसलो, तन्नै ही तो करणो है,
तेरै नाम लिख दी जिंदगानी, मांग रियो हरजाणो हूं,
लगन लगा कै करूं चाकरी.....(२)

थूं मेरै रग-रग री जाणै, मेरो तो हमराज़ तू ही,
दुखिया दिल रो ताज तू ही है, प्रेम भरी आवाज तू ही,
कोई दूजो बांच सकै ना, मैं ऐसो अफसानो हूं,
लगन लगा कै करूं चाकरी.....(३)

तेरे दर पे लगाई नजरें, मैंने सांवरा
मैंने सांवरा, मैं तो हुआ बावरा,
तेरे दर पे लगाई नजरें मैंने सांवरा

मेरे जीवन की किताब का, पहला पन्ना नाम तेरे,
"बिन्नू" को संतोष यही है, कुछ तो आऊं काम तेरे,
थूं मेरी आंख्यां रो दीपक, मैं तेरो परवानो हूं,
लगन लगा कै करूं चाकरी.....(४)

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