मैं भोला पर्वत का वासी हूँ निवासी हूँ भजन

मैं भोला पर्वत का वासी हूँ निवासी हूँ भजन

मैं भोला पर्वत का वासी हूँ निवासी हूँ,
मैं भोला पर्वत का वासी हूँ निवासी हूँ।

मैं भोला पर्वत का वासी तू क्यू बनान लगी दासी,
मैं भोला पर्वत का वासी तू क्यू बनान लगी दासी,
अरे जिद अपनी तू छोड़ दे मन,
मन मुझसे अपना मोड ले,
मैं ही आदी मैं अनंत हूँ,
मैं दानव मैं ही संत हूँ,
मैं भोला पर्वत का वासी हूँ निवासी हूँ।

शफरी से मिलते नैन तेरे,
मेरे नैन मैं अग्नि जलती है,
मेने विष में कंठ सजया है,
तेरे रूप से मयूरी खिलती है,
शफरी से मिलते नैन तेरे,
मेरे नैन मैं अग्नि जलती है,
मेने विष में कंठ सजया है,
तेरे रूप से मयूरी खिलती है,
एक डेरा तेरे दिल में मेरा,
एक डेरा मेरा पर्वत मैं,
मैं भोला पर्वत का वासी हूँ निवासी हूँ,
मैं भोला पर्वत का वासी हूँ निवासी हूँ।

मेरी डाल दो भवरिया भोले जी के संग,
मेरी डाल दो भवरिया भोले जी के संग,
भोले जी के संग जट्टाधारी जी के संग,
भोले जी के संग जट्टाधारी जी के संग,
मेरी दाल दो भवरिया भोले जी के संग,
मैं भोला पर्वत का वासी हूँ निवासी हूँ।

मृग चल ओढ़ कर बैठा हूँ,
तुझे भावे रेशम के जोड़े,
नंदी की करू सवारी मैं,
मेरे पास नहीं हाथी घोड़े,
मृग चल ओढ़ कर बैठा हूँ,
तुझे भावे रेशम के जोड़े,
नंदी की करू सवारी मैं,
मेरे पास नहीं हाथी घोड़े,
घनघोर अघोरी कहलाऊ,
कहलाता हूँ कैलाशी मैं,
मैं भोला पर्वत का वासी हूँ निवासी हूँ,
मैं भोला पर्वत का वासी हूँ निवासी हूँ।

Main Bhola Parvat Ka (Official Video) Bholenath Song | New Song 2022 | Shekhar Jaiswal

Singer - Shekhar Jaiswal
Music - GW Music Studio Rudrapur (Saif)
Lyrics - Lucky Hundal
Cast - Shekhar Jaiswal, Kanika Bisht
Direction & Scripted By - Soumya Jaiswal
Cinematography - Lucky Hundal
Produced By - Mahadev
Location - Almora, Jageshwar, Sattal (Uttarakhand)
Edited By - Shekhar Jaiswal 

कैलाश पर्वत की ठंडी हवाओं में रहने वाले भोलेनाथ जब दिल में बस जाते हैं, तो सारी दुनिया की चकाचौंध फीकी पड़ जाती है। वे आदी-अनंत हैं, दानव और संत दोनों में समाए हुए हैं। जिद छोड़कर मन उनकी तरफ मोड़ लो, तो सारा अहंकार और लगाव खुद-ब-खुद दूर हो जाता है। उनके नैनों में अग्नि जलती है, फिर भी किसी के रूप पर मयूरी खिल उठती है। विष को कंठ में सजाकर भी वे सबसे प्यार बरसाते रहते हैं।
एक तरफ उनका डेरा दिल में बन जाता है, तो दूसरी तरफ कैलाश पर्वत उनका घर रहता है। मृगछाल ओढ़कर, नंदी की सवारी पर चलते हुए वे घनघोर अघोरी और कैलाशी कहलाते हैं। रेशम के जोड़ों की जगह सादगी उन्हें भाती है। हाथी-घोड़े नहीं, पर उनके साथ चलने वाली भवरिया को जब भोले जी के संग डाल दिया जाता है, तो जीवन का हर पल जटाधारी महादेव के साथ गुजरने लगता है।
जब भी मन में कोई खींचतान हो या साधारण जीवन मुश्किल लगे, बस उनके कैलाश की याद कर लो। वे सब कुछ संभाल लेते हैं और मन को शांति दे देते हैं। 

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