राम कहने से तर जायेगा पार भव भजन
पार भव से उत्तर जायेगा,
राम कहने से तर जायेगा,
पार भव से उत्तर जायेगा।
उस गली होगी चर्चा तेरी,
जिस गली से गुजर जायेगा,
राम कहने से तर जायेगा,
पार भव से उत्तर जायेगा।
बड़ी मुश्किल से नर तन मिला,
कल ना जाने किधर जायेगा,
राम कहने से तर जायेगा,
पार भव से उत्तर जायेगा।
अपना दामन तो फैला जरा,
कोई दातार भर जायेगा,
राम कहने से तर जायेगा,
पार भव से उत्तर जायेगा।
सब कहेंगे कहानी तेरी,
जब इधर से उधर जायेगा,
राम कहने से तर जायेगा,
पार भव से उत्तर जायेगा।
याद आयेगी चेतन तेरी,
काम ऐसा जो कर जायेगा,
राम कहने से तर जायेगा,
पार भव से उत्तर जायेगा।
राम कहने से तर जायेगा,
पार भव से उत्तर जायेगा,
राम कहने से तर जायेगा,
पार भव से उत्तर जायेगा।
Ram Kahne Se Tar Jaayega
Ram Kahne Se Tar Jaayega · Shri Prem Bhushan Ji Maharaj
Hum Ramji Ke Ram Ji Hamare Hain
℗ Super Cassettes Industries Limited
Released on: 2006-03-07
संसार का पार कोई धन, बुद्धि या सामर्थ्य नहीं, केवल राम नाम करा सकता है। प्रत्येक पंक्ति वह स्मरण कराती है कि यह देह क्षणभंगुर है, क्षण में आया जीवन क्षण में लौट जा सकता है। “बड़ी मुश्किल से नर तन मिला” इस भाव में वह चेतावनी है कि यह जीवन व्यर्थ न जाए; इसे प्रभु नाम में लगा ले — यही साधना, यही मुक्ति का मार्ग है। राम का नाम यहाँ केवल देवता की उपासना नहीं, बल्कि आत्मा की शरण बन जाता है — वह मंत्र जो सांसारिक मोह से मुक्त करता है और भवसागर के पार उतार देता है।
यह भाव संसार के व्यर्थ मोह-मायाजाल से बाहर निकलने का आमंत्रण है। जब कहा जाता है “उस गली होगी चर्चा तेरी, जिस गली से गुजर जायेगा,” उसका अर्थ केवल नाम कमाना नहीं, बल्कि वह तेज बिखेरना है जो ईश्वर-स्मरण से जन्म लेता है। मनुष्य जब राम कहता है, तब भीतर की कलुषता गलने लगती है, कर्म पवित्र हो जाते हैं, और साधारण जीवन भी अमर गाथा बन जाता है। जो मनुष्य अपने कर्मों से प्रेम, दया और सत्य की राह चुनता है — वही वास्तव में तर जाता है। इस पावन भाव में यही सार प्रकट होता है — कि जो जीवन “राम” में बस गया, वह मरण और भय की सीमा से भी ऊपर चला गया।
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