लोग कहेला तू ज्ञान के भंडार मैया जी भजन

लोग कहेला तू ज्ञान के भंडार मैया जी भजन


लोग कहेला तू ज्ञान के,
भंडार मैया जी,
हाथे वीणा बा धइले,
हमार मैया जी।।

कला संस्कृति माई,
रउए से आला,
जीवन अन्हार बाटे,
करी द उजाला,
सोहे माथे मुकुट,
गले हार मैया जी,
हाथे वीणा बा धइले,
हमार मैया जी।。

बुद्धि आ ज्ञान रउए,
दर पे भेटाला,
खाली ना जाई तोहर,
बात बा निराला,
श्वेत वस्त्र हंस पे,
सवार मैया जी,
हाथे वीणा बा धइले,
हमार मैया जी।。

लोग कहेला तू ज्ञान के,
भंडार मैया जी,
हाथे वीणा बा धइले,
हमार मैया जी।।


हाथे वीणा बा धइले हमार मैया जी लेटेस्ट रिलीज़ सरस्वती भजन Singer Vidyakant #Newsaraswatibhajan2026

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Vocal - Vidyakant Jha 
Tabla- Omprakash Amar
Lyrics - Suryakant Jha 
Recording - AR Studio Vidyapatinagar
 
तेरी वीणा की हर तार जब मन के भीतर छेड़े, तो अँधेरों की डालियाँ फूल बन उठती हैं; ज्ञान की जिस गहरी नदी को तू बहाती है, वह अज्ञान की रेतों को धोकर जीवन में प्रकाश भर देती है। तेरे मुकुट की शोभा और हंस-सवारी की सरलता में एक सौम्य गरिमा है जो दिखावे से परे, आत्मा को सजा देती है। तेरा दान-भाव इतना उदार कि जो भी तेरे द्वार आए, हाथ खाली न लौटे—तेरी वाणी में जो मधुरता बसती है, वही विद्या का सार बनकर हृदय में उतर आती है। कला और संस्कृति की थाती बनकर तू जीवन की सूनी गलियों में संगीत की लहरें चलाती है; वे लहरें आस-पास के हर मन को जगमगा देती हैं और सीख देती हैं कि सुंदरता, श्रद्धा और ज्ञान साथ-साथ चलकर ही सचमुच का उजियारा करते हैं।
 
Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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