शेरावाली के दो नैन प्यारे प्यारे भजन
शेरावाली के दो नैन प्यारे प्यारे भजन
शेरावाली के दो नैन प्यारे प्यारे
तेरे मुकुट में चमके सितारे,
अब मुझे गगन से क्या लेना, क्या लेना,
शेरावाली के दो नैन प्यारे प्यारे,
तेरे मुकुट में चमके सितारे।।
(तर्ज – तेरे होंठो के दो फूल प्यारे)
तेरा टीका चमचम चमके,
तेरी बिंदियों से होता उजाला,
तेरा झुमका दमदम दमके,
तेरे होने से होता सवेरा,
तेरी शक्ति है अपार,
तुझको पूजे ये संसार,
मैया अपनी कृपा दिखा जाना, दिखा जाना,
शेरावाली के दो नैन प्यारे प्यारे,
तेरे मुकुट में चमके सितारे।।
तेरा चोला चमचम चमके,
तेरी चुनरी से होता सवेरा,
तेरा नेवर दमदम दमके,
तेरी नथनी से होता सवेरा,
मैया एक तेरा साथ,
मेरे सिर पे हो हाथ,
मेरा बेड़ा पार लगा जाना, लगा जाना,
शेरावाली के दो नैन प्यारे प्यारे,
तेरे मुकुट में चमके सितारे।।
तेरा कंगना खनखन खनके,
तेरी मेहंदी से होता उजाला,
तेरी पायल छमछम छमके,
तेरे बिछुए से होता सवेरा,
हम आए तेरे द्वार,
लाए सोलह सिंगार,
अब भक्ति का अलख जगा जाना, जगा जाना,
शेरावाली के दो नैन प्यारे प्यारे,
तेरे मुकुट में चमके सितारे।।
शेरावाली के दो नैन प्यारे प्यारे
तेरे मुकुट में चमके सितारे,
अब मुझे गगन से क्या लेना, क्या लेना,
शेरावाली के दो नैन प्यारे प्यारे,
तेरे मुकुट में चमके सितारे।।
तेरे मुकुट में चमके सितारे,
अब मुझे गगन से क्या लेना, क्या लेना,
शेरावाली के दो नैन प्यारे प्यारे,
तेरे मुकुट में चमके सितारे।।
(तर्ज – तेरे होंठो के दो फूल प्यारे)
तेरा टीका चमचम चमके,
तेरी बिंदियों से होता उजाला,
तेरा झुमका दमदम दमके,
तेरे होने से होता सवेरा,
तेरी शक्ति है अपार,
तुझको पूजे ये संसार,
मैया अपनी कृपा दिखा जाना, दिखा जाना,
शेरावाली के दो नैन प्यारे प्यारे,
तेरे मुकुट में चमके सितारे।।
तेरा चोला चमचम चमके,
तेरी चुनरी से होता सवेरा,
तेरा नेवर दमदम दमके,
तेरी नथनी से होता सवेरा,
मैया एक तेरा साथ,
मेरे सिर पे हो हाथ,
मेरा बेड़ा पार लगा जाना, लगा जाना,
शेरावाली के दो नैन प्यारे प्यारे,
तेरे मुकुट में चमके सितारे।।
तेरा कंगना खनखन खनके,
तेरी मेहंदी से होता उजाला,
तेरी पायल छमछम छमके,
तेरे बिछुए से होता सवेरा,
हम आए तेरे द्वार,
लाए सोलह सिंगार,
अब भक्ति का अलख जगा जाना, जगा जाना,
शेरावाली के दो नैन प्यारे प्यारे,
तेरे मुकुट में चमके सितारे।।
शेरावाली के दो नैन प्यारे प्यारे
तेरे मुकुट में चमके सितारे,
अब मुझे गगन से क्या लेना, क्या लेना,
शेरावाली के दो नैन प्यारे प्यारे,
तेरे मुकुट में चमके सितारे।।
शेरावाली के दो नैन प्यारे | Sherawali Ke Do Nain Pyare | 2017 Mata Bhajan | Jai Mata Di Bhajan
ऐसे ही अन्य भजनों के लिए आप होम पेज / गायक कलाकार के अनुसार भजनों को ढूंढें.
पसंदीदा गायकों के भजन खोजने के लिए यहाँ क्लिक करें।
ऐसे ही अन्य भजनों के लिए आप होम पेज / गायक कलाकार के अनुसार भजनों को ढूंढें.
पसंदीदा गायकों के भजन खोजने के लिए यहाँ क्लिक करें।
Navratri Mata Bhajan
SONG : Sherawali Ke Do Nain
SINGER : Sonu Kaushik,Krishma Sharma
LYRICS : Sonu Kaushik
SONG : Sherawali Ke Do Nain
SINGER : Sonu Kaushik,Krishma Sharma
LYRICS : Sonu Kaushik
माँ शेरावाली की भक्ति में डूबा भक्त उनके सौंदर्य और शक्ति की महिमा को हृदय से गाता है, जहाँ माँ के दो नैन और उनके मुकुट में चमकते सितारे उसके लिए सारे संसार का आलोक बन जाते हैं। माँ का प्रत्येक श्रृंगार—चमकता टीका, झुमका, चोला, चुनरी, नथनी, कंगना, मेहंदी, पायल और बिछुए—न केवल उनके दिव्य रूप को और निखारता है, बल्कि भक्त के जीवन में उजाला और सवेरा लाता है। यह भक्ति का वह स्वरूप है, जो माँ की कृपा को हर भक्त के लिए एक अनमोल रत्न बनाता है, जो संसार के सारे सुखों से बढ़कर है। भक्त का मन माँ के इन प्यारे नैनों में खो जाता है, और वह यह विश्वास रखता है कि माँ का एकमात्र साथ और उनका आशीर्वाद उसके जीवन को हर संकट से पार लगा देगा।
माँ की शक्ति और उनके प्रेम की महिमा इतनी अपार है कि सारा संसार उनकी पूजा करता है, और भक्त उनके चरणों में सोलह श्रृंगार लेकर अपनी भक्ति अर्पित करता है। यह श्रृंगार केवल बाहरी नहीं, बल्कि भक्त के हृदय की शुद्धता और समर्पण का प्रतीक है, जो माँ के प्रति उसकी अटूट निष्ठा को दर्शाता है। वह माँ से केवल यही प्रार्थना करता है कि उनकी कृपा उसके जीवन में भक्ति की अलख जगाए और उसका बेड़ा पार करे। माँ का यह दिव्य रूप और उनकी करुणा भक्त के लिए एक ऐसी शरण है, जहाँ उसे गगन के सितारों की आवश्यकता नहीं, क्योंकि माँ के नैन और उनकी कृपा ही उसके लिए सारा संसार है। यह भक्ति का वह भाव है, जो माँ के प्रेम में हर भक्त को एक अनंत आनंद की अनुभूति कराता है।
माँ की शक्ति और उनके प्रेम की महिमा इतनी अपार है कि सारा संसार उनकी पूजा करता है, और भक्त उनके चरणों में सोलह श्रृंगार लेकर अपनी भक्ति अर्पित करता है। यह श्रृंगार केवल बाहरी नहीं, बल्कि भक्त के हृदय की शुद्धता और समर्पण का प्रतीक है, जो माँ के प्रति उसकी अटूट निष्ठा को दर्शाता है। वह माँ से केवल यही प्रार्थना करता है कि उनकी कृपा उसके जीवन में भक्ति की अलख जगाए और उसका बेड़ा पार करे। माँ का यह दिव्य रूप और उनकी करुणा भक्त के लिए एक ऐसी शरण है, जहाँ उसे गगन के सितारों की आवश्यकता नहीं, क्योंकि माँ के नैन और उनकी कृपा ही उसके लिए सारा संसार है। यह भक्ति का वह भाव है, जो माँ के प्रेम में हर भक्त को एक अनंत आनंद की अनुभूति कराता है।
नवरात्रि में शक्ति के तीन रूप—इच्छा शक्ति, क्रिया शक्ति और ज्ञान शक्ति—का वैज्ञानिक आधार यह है कि ये तीनों रूप प्रकृति के सत्व, रज और तम तीन गुणों से उत्पन्न होते हैं। सत्वगुण ज्ञान शक्ति का, रजोगुण इच्छा शक्ति का और तमोगुण क्रिया शक्ति का प्रतिनिधित्व करते हैं। वैज्ञानिक दृष्टि से, ये तीनों गुण हमारे शरीर, मन और चेतना के संतुलन के लिए आवश्यक हैं। जब व्यक्ति नवरात्रि के दौरान उपवास, ध्यान, संयम और साधना करता है, तो उसके भीतर इन तीनों शक्तियों का संतुलन स्थापित होता है, जिससे मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य में सुधार आता है। ऋतु परिवर्तन के समय शरीर और मन में जो असंतुलन उत्पन्न होता है, उसे यह साधना दूर करती है। इसलिए नवरात्रि में शक्ति के तीन रूपों की पूजा न केवल धार्मिक आस्था का विषय है, बल्कि यह मानव जीवन के संतुलन और विकास के लिए वैज्ञानिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।
यह भजन भी देखिये
|
Author - Saroj Jangir
इस ब्लॉग पर आप पायेंगे मधुर और सुन्दर भजनों का संग्रह । इस ब्लॉग का उद्देश्य आपको सुन्दर भजनों के बोल उपलब्ध करवाना है। आप इस ब्लॉग पर अपने पसंद के गायक और भजन केटेगरी के भजन खोज सकते हैं....अधिक पढ़ें। |
