मैनु चढ़ गई चढ़ गई मस्ती सतगुरु दे नाम दी

मैनु चढ़ गई चढ़ गई मस्ती सतगुरु दे नाम दी

मैनूं चढ़ गई, चढ़ गई मस्ती सतगुरु दे नाम दी,
इस मस्ती विच द्वे सुनाई, मुरली एहदे निशान दी,
मैनूं चढ़ गई, चढ़ गई मस्ती सतगुरु दे नाम दी।

जो भी इस मस्ती दे रंगा विच रच गए,
गुरु दे द्वारे उत्ते झूम-झूम नच गए,
एह आ मस्ती जिस विच रच के मीरा हो गई श्याम दी,
मैनूं चढ़ गई, चढ़ गई मस्ती सतगुरु दे नाम दी।

जिन्हां नूं लोड़ इस मस्ती दी चढ़ गई,
ओहना दी ता बाह सतगुरु ने फड़ लाई,
लोड नहीं फिर रह जांदी जग दे ऐश आराम दी,
मैनूं चढ़ गई, चढ़ गई मस्ती सतगुरु दे नाम दी।

तरसेम गुरा दे मलंग जो भी बन गए,
धीरज दे वांगू कर रहे प्रशन गए,
चढ़ के जो न फेर उतरदी, ओह मस्ती इस जाम दी,
मैनूं चढ़ गई, चढ़ गई मस्ती सतगुरु दे नाम दी।


Masti Satguru de Naam di// Dheeraj Sharma//S.Mani// Tarsem Lal//

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Saroj Jangir Author Admin - Saroj Jangir

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