मेरे राम मेरे हक में इतना ज़रूर करना भजन
मेरे राम मेरे हक में इतना ज़रूर करना भजन
मेरे राम, मेरे हक में,
इतना ज़रूर करना,
जब तक रहूँ मैं ज़िंदा,
खुद से ना दूर करना,
जब तक रहूँ मैं ज़िंदा,
खुद से ना दूर करना।।
जब नाम लूँ तुम्हारा,
साँसों में तुम समाना,
मेरे दिल की वादियों में,
अपना शहर बसाना,
रघुवर, मेरे लहू में,
भक्ति का नूर भरना,
जब तक रहूँ मैं ज़िंदा,
खुद से ना दूर करना।।
जब तक हो धड़कनों में,
कोई एक साँस बाकी,
तब तक बनाए रखना,
मुझ पर नज़र कृपा की,
अँखियों के सामने से,
बस तुम ही तुम गुज़रना,
जब तक रहूँ मैं ज़िंदा,
खुद से ना दूर करना।।
हसरत है तेरे दम पे,
कुछ यूँ गुज़र-बसर हो,
मुझ पर जहाँ के सारे,
दुख-दर्द बेअसर हो,
उम्मीद दिल की कोई,
ना चूर-चूर करना,
जब तक रहूँ मैं ज़िंदा,
खुद से ना दूर करना।।
मेरे राम, मेरे हक में,
इतना ज़रूर करना,
जब तक रहूँ मैं ज़िंदा,
खुद से ना दूर करना,
जब तक रहूँ मैं ज़िंदा,
खुद से ना दूर करना।।
इतना ज़रूर करना,
जब तक रहूँ मैं ज़िंदा,
खुद से ना दूर करना,
जब तक रहूँ मैं ज़िंदा,
खुद से ना दूर करना।।
जब नाम लूँ तुम्हारा,
साँसों में तुम समाना,
मेरे दिल की वादियों में,
अपना शहर बसाना,
रघुवर, मेरे लहू में,
भक्ति का नूर भरना,
जब तक रहूँ मैं ज़िंदा,
खुद से ना दूर करना।।
जब तक हो धड़कनों में,
कोई एक साँस बाकी,
तब तक बनाए रखना,
मुझ पर नज़र कृपा की,
अँखियों के सामने से,
बस तुम ही तुम गुज़रना,
जब तक रहूँ मैं ज़िंदा,
खुद से ना दूर करना।।
हसरत है तेरे दम पे,
कुछ यूँ गुज़र-बसर हो,
मुझ पर जहाँ के सारे,
दुख-दर्द बेअसर हो,
उम्मीद दिल की कोई,
ना चूर-चूर करना,
जब तक रहूँ मैं ज़िंदा,
खुद से ना दूर करना।।
मेरे राम, मेरे हक में,
इतना ज़रूर करना,
जब तक रहूँ मैं ज़िंदा,
खुद से ना दूर करना,
जब तक रहूँ मैं ज़िंदा,
खुद से ना दूर करना।।
मेरे राम मेरे हक़ में - Ayodhya Mere Ram Ki | Devendra Pathak | Hindi Ram Bhajan 2015
ऐसे ही अन्य भजनों के लिए आप होम पेज / गायक कलाकार के अनुसार भजनों को ढूंढें.
पसंदीदा गायकों के भजन खोजने के लिए यहाँ क्लिक करें।
ऐसे ही अन्य भजनों के लिए आप होम पेज / गायक कलाकार के अनुसार भजनों को ढूंढें.
पसंदीदा गायकों के भजन खोजने के लिए यहाँ क्लिक करें।
Singer – Devendra Pathak
Lyrics - Anupam Pandey
WAVE MUSIC
Lyrics - Anupam Pandey
WAVE MUSIC
तेरे नाम की सौंधी खुशबू सांसों में रच बस जाए, कि हर उठती साँस तेरा ही पुकार बने। दिन-रात के खिड़की-खिड़की में तेरी याद का बसेरा हो, और मेरे दिल की उन सूखी वादियों में तेरी कविता की हरियाली खिल उठे। रघुवर का जो उजाला लहू में फैल जाए, वह मुस्कान की तरह ग़मों को मटियामेट कर दे; मेरी धड़कनें तभी तक गीत गुनगुनाएँ जब तक साँसें संग हों। तेरी कृपा की एक नजर सिर पर जब टिके, तो आँखों के सामने दुनिया से बढ़कर बस तेरा ही अक्स बहता रहे। आशा की डोर को टूटने ना देना — वह डोर ही तो है जो हर तकलीफ को हल्का कर दे और मुझे तेरे पास बाँधे रखे। जब तक जीवन की आखिरी साँस रहे, बस इतना कि तू मुझसे जुदा न होना। जय श्री राम।
यह भजन भी देखिये
|
Author - Saroj Jangir
इस ब्लॉग पर आप पायेंगे मधुर और सुन्दर कृष्णा भजन, जन्माष्टमी भजन, भजनों का संग्रह । इस ब्लॉग का उद्देश्य आपको सुन्दर भजनों के बोल/Lyrics उपलब्ध करवाना है। आप इस ब्लॉग पर अपने पसंद के गायक और भजन केटेगरी के भजन खोज सकते हैं....अधिक पढ़ें। |
