मार के सुट्टा भरी चिलम बम लहरी बमबम भजन
मार के सुट्टा भरी चिलम बम लहरी बमबम भजन
मार के सुट्टा भरी चिलम,का भुत जगत में खेल्या सु,
अपने धुन में जिया करू मैं,
भोलेनाथ का चेला सु।
कैलाश पे वास करै से,
यो भांग धतुरा पिवनिया,
मस्त बना दे बन्दे ने,
यो मस्ती के मै जीवनिया,
मोह माया ते दूर हो गया,
मेरे नाथ कि गेल्या सु,
अपने धुन में जिया करू,
मैं भोलेनाथ का चेला सु,
अपने धुन में जिया करू,
मैं भोलेनाथ का चेला सु।
इस मारया हाथ मेरे भोला साथ,
मैं मार धाड़ से पी गया,
चार दिना की जिंदगी थी,
इस जिंदगी ने मैं जी गया,
काड माड सु दुनिया काड़ी,
मैं तो साथ अकेला सु,
अपने धुन में जिया करू,
मैं भोलेनाथ का चेला सु,
अपने धुन में जिया करू,
मैं भोलेनाथ का चेला सु।
चिलम खीच के आँख,
बेच के दर्शन कर लू तेरे,
बियर दिलविच दम,
मारे से डेली शाम सवेरे,
झुलफेगी लोर से चारो ओर,
मैं होया फिरू अलबेला सु,
झुलफेगी लोर से चारो ओर,
मैं होया फिरू अलबेला सु,
अपने धुन में जिया करू,
मैं भोलेनाथ का चेला सु,
अपने धुन में जिया करू,
मैं भोलेनाथ का चेला सु।
Bholenath Ka Chela | Manjeet Panchal | TR | BR Parvesh | New Haryanavi Songs Haryanvi
Song - Bholenath Ka Chela
Singer - TR
Composer - TR Music
Lyrics - BR Parvesh
Starring - Manjeet Panchal
Director - Manjeet Panchal
DOP - Bablu Kashyap
VFX - Gurnesh Bishnoi
Editor - Virender Chopra
यह भाव ऐसा है जैसे भोलेनाथ के चेले की एक अपनी दुनिया हो, जिसमें सुट्टा, चिलम, धून, भांग और धतूरा बस एक ही रंग की पेंट हैं—दिल को झूमने के लिए। “मार के सुट्टा भरी चिलम” से निकलने वाली धुआँ इस बात की तरह लगती है कि जीवन की चिंता, माया, लोकी बातें सब हट कर पीछे खड़ी हैं, और आगे सिर्फ वही राह दिखाई देती है जहाँ केवल भोलेनाथ की धुन है। इस धुन में रहने का मतलब यही है कि दुनिया की सामान्य समझ से थोड़ा दूर, अपनी ही तरह जिया जाए।
यहाँ कैलाश पर शिव की लीला भी दिखाई देती है—भांग और धतूरा के साथ जो “मस्ती” बनाई जाती है, वही मस्ती भक्त के लिए जीवन बन जाती है। जब मोह‑माया से दूर होकर नाथ के नाम में डूब जाता है, तब उसे लगता है कि अब उसके जीवन की गति अलग है, दूसरों से अलग, लेकिन अपने भोलेनाथ के साथ इतनी जुड़ी कि अकेले भी महसूस होने पर भी “अकेलापन” नहीं लगता। चिलम खींचकर आँखें बंद करना उस दर्शन के लिए है जो भीतर ही उभरता है, और जब मारधाड़ में यह मस्ती बढ़ जाती है, तो झुलफेगी लोर से चारों ओर फैल जाती है—जैसे भक्त पूरी तरह “अलबेला” होकर अपने विश्वास की ही धुन में घूमने लगता है। आप सभी पर इश्वर की कृपा बनी रहे। जय श्री भोलेनाथ जी की।
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