राम का ऐसा दीवाना दूसरा देखा नहीं भजन
राम का ऐसा दीवाना दूसरा देखा नहीं भजन
राम का ऐसा दीवाना,
दूसरा देखा नहीं,
दूसरा देखा नहीं, दूसरा देखा नहीं,
कहता है सारा ज़माना,
दूसरा देखा नहीं।।
खोज सीता जी की लाए,
सोने की लंका जलाए,
धीर रघुवर को बँधाए,
दूसरा कोई देखा नहीं।।
राम के रंग में रंगे हैं,
राम साँसों में रमे हैं,
राम सीने में बसे हैं,
दूसरा देखा नहीं।।
राम की सेवा में जीवन,
कर दिया जिसने समर्पण,
राम को अभिमान जिनपे,
दूसरा देखा नहीं।।
राम जी का भक्त ऐसा,
ना हुआ, न होगा कोई,
राम भी मोहित हैं जिसपे,
दूसरा देखा नहीं।।
दूसरा देखा नहीं,
दूसरा देखा नहीं, दूसरा देखा नहीं,
कहता है सारा ज़माना,
दूसरा देखा नहीं।।
खोज सीता जी की लाए,
सोने की लंका जलाए,
धीर रघुवर को बँधाए,
दूसरा कोई देखा नहीं।।
राम के रंग में रंगे हैं,
राम साँसों में रमे हैं,
राम सीने में बसे हैं,
दूसरा देखा नहीं।।
राम की सेवा में जीवन,
कर दिया जिसने समर्पण,
राम को अभिमान जिनपे,
दूसरा देखा नहीं।।
राम जी का भक्त ऐसा,
ना हुआ, न होगा कोई,
राम भी मोहित हैं जिसपे,
दूसरा देखा नहीं।।
राम का ऐसा दीवाना दूसरा देखा नहीं || Manish Bhatt || Ram Ka Aisa Deewana Dusra Dekha Nahi
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⇨Album :- राम का ऐसा दीवाना दूसरा देखा नहीं
⇨Bhajan :- Ram Ka Aisa Deewana Dusra Dekha Nahi
⇨Singer :- Manish Bhatt
⇨Copyright :- Skylark Infotainment
⇨Vendor :- A2z Music Media
⇨Bhajan :- Ram Ka Aisa Deewana Dusra Dekha Nahi
⇨Singer :- Manish Bhatt
⇨Copyright :- Skylark Infotainment
⇨Vendor :- A2z Music Media
श्रीहनुमान जी की भक्ति संसार में अद्वितीय मानी जाती है, क्योंकि उनके जीवन का प्रत्येक क्षण केवल प्रभु श्रीराम की सेवा और स्मरण को समर्पित रहा। उनके लिए शक्ति, ज्ञान, यश और पराक्रम का कोई महत्व नहीं था, यदि वह श्रीराम के कार्य में न लगे। माता सीता की खोज, लंका दहन और हर कठिन परिस्थिति में प्रभु के कार्य को सफल बनाना उनके अटूट विश्वास, साहस और निष्काम सेवा का प्रमाण है। उन्होंने कभी अपने पराक्रम का अभिमान नहीं किया, बल्कि हर सफलता का श्रेय अपने आराध्य को ही दिया। यही विनम्रता उन्हें समस्त भक्तों में सर्वोच्च स्थान प्रदान करती है।
हनुमान जी का हृदय केवल श्रीराम के प्रेम से भरा हुआ था। उनके तन, मन, वचन और प्रत्येक श्वास में केवल राम-नाम ही बसता था। यही कारण है कि स्वयं प्रभु श्रीराम भी अपने ऐसे अनन्य भक्त पर स्नेह और गर्व प्रकट करते हैं। उनकी भक्ति यह प्रेरणा देती है कि जब जीवन पूरी निष्ठा, समर्पण और निष्कपट प्रेम से ईश्वर को अर्पित कर दिया जाता है, तब असंभव भी संभव हो जाता है। हनुमान जी का आदर्श सिखाता है कि सच्चा भक्त वही है, जिसके हृदय में अपने आराध्य के अतिरिक्त किसी अन्य इच्छा का स्थान न हो। जय श्री हनुमान! जय श्रीराम!
हनुमान जी का हृदय केवल श्रीराम के प्रेम से भरा हुआ था। उनके तन, मन, वचन और प्रत्येक श्वास में केवल राम-नाम ही बसता था। यही कारण है कि स्वयं प्रभु श्रीराम भी अपने ऐसे अनन्य भक्त पर स्नेह और गर्व प्रकट करते हैं। उनकी भक्ति यह प्रेरणा देती है कि जब जीवन पूरी निष्ठा, समर्पण और निष्कपट प्रेम से ईश्वर को अर्पित कर दिया जाता है, तब असंभव भी संभव हो जाता है। हनुमान जी का आदर्श सिखाता है कि सच्चा भक्त वही है, जिसके हृदय में अपने आराध्य के अतिरिक्त किसी अन्य इच्छा का स्थान न हो। जय श्री हनुमान! जय श्रीराम!
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Author - Saroj Jangir
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