बढ़ रहा है पाप भारी हे प्रभु अवतार लो

बढ़ रहा है पाप भारी हे प्रभु अवतार लो

 
हे प्रभु अवतार लो Hey Prabhu Avtar Lo Lyrics

धर्म का विस्तार हो,
अधर्म का विनाश हो,
बढ़ रहा है पाप भारी,
हे प्रभु अवतार लो।

आ गई है फिर से,
प्रभु घड़ी अवतार की,
धर्म की है हालत ऐसी,
जैसे लाचार की,
हानि हो रही है यहां,
मान सम्मान की,
हंसी उड़ाते लोग,
भगवान के भी नाम की।

निस्वार्थ ना कोई कर्म है,
बढ़ रहा अधर्म है,
मंदिरों में जाने में,
आती इनको शर्म है,
धर्म पे भी तर्क है,
जातियों में वर्ग है,
पढ़ते गीता भागवत,
पर जानते ना मर्म है।

अधर्म ही अधर्म,
चहुं ओर है छा रहा,
ज्ञानियों का ज्ञान,
किसी काम नहीं आ रहा,
कर रहे है सब वही,
जो मन को उनके भा रहा,
दिख रहा है दुनिया में,
जो वही हूं मैं गा रहा।

कैसा है यह प्रावधान,
बिगड़ा हुआ खानपान,
घर के गेट पर लिखा है,
कुत्तों से सावधान।

क्या कहूं मैं हाल,
कैसा है तेरी सृष्टि का,
पराई नारी देखते,
यह दोष है दृष्टि का।

धर्म का विस्तार हो,
अधर्म का विनाश हो,
बढ़ रहा है पाप भारी,
हे प्रभु अवतार लो।

धर्म से अधर्म से,
चाहते हैं सब उपलब्धियां,
ना देखने को मिलती है,
रघुकुल कि वो रीतियां,
अधर्म इतना बढ़ रहा,
ना छोड़ते हैं नदियों को,
गंगा यमुना में लोग,
कर रहे अशुद्धियां।

रामराज्य फिर से आए,
सब की यही कामना,
विध्वंस करो पाप का,
हो धर्म की स्थापना,
प्रेम का ना मोल,
पैसों से बिकती भावना,
कलयुग में लो अवतार,
हम करते यही प्रार्थना।

लड़कियों की हत्या,
गर्भपात का ही रूप है,
नारी पर अत्याचार मां,
भवानी का स्वरूप है,
कलयुग की द्रौपदी की,
लाज का न कोई मोल है,
छोड़ के भगवान को,
यह पूजते भूत है।

नारी का सम्मान है,
यहां मूर्ख बुद्धिमान है,
मां बाप की सेवा करने में,
घटती इनकी शान है।

धर्म का विस्तार हो,
अधर्म का विनाश हो,
बढ़ रहा है पाप भारी,
हे प्रभु अवतार लो।

धर्म की आड़ में,
अधर्म है बढ़ रहा,
परेशान है वह यहां,
जो सत्य पर चल रहा,
अधर्म इतना बढ़ रहा,
नारी का तन बिक रहा,
सो रहे है सब यहां,
ना कोई कुछ है कर रहा।

पापी और अधर्मीयों के,
चेहरो पे नकाब है,
दिन में पूजा पाठ,
पीते शाम को शराब है,
सबसे ज्यादा लूट होती,
धर्म के ही नाम पर,
क्योंकि धर्म के ही,
रक्षक धर्म के दलाल है।

धर्म का विस्तार हो,
अधर्म का विनाश हो,
बढ़ रहा है पाप भारी,
हे प्रभु अवतार लो।

हे प्रभु अवतार लो,
हे प्रभु अवतार लो।

वृंदावन वास मिला,
आपकी कृपा है ये,
अधर्म से मैं दूर रहूं,
मांगू यही दुआएं में,
अरदास मेरी इतनी,
तुमसे है सुन लो प्रभु,
मेरी जिंदगी का हर पल,
गुजरे तेरे साए में।

धर्म का विस्तार हो,
अधर्म का विनाश हो,
बढ़ रहा है पाप भारी,
हे प्रभु अवतार लो।

 Avatar:The Way of Praying by Today's Youth - Devotional RAP Madhavas Rock Band ft. @DevotionalSangeetfoundation

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