मैं श्यामा की लाडली मेरे सर पर चुनरी भजन
मैं श्यामा की लाडली मेरे सर पर चुनरी भजन
मैं श्यामा की लाडली,मेरे सर पर चुनरी ज्ञान की,
याहै दिन ओढ़ हूं या रात,
मैं श्यामा की लाडली।
श्यामा मधुबन मधुबन में फिरी,
मुझे कहीं ना मिले घनश्याम,
मैं श्यामा की लाडली।
मीरा मधुबन घूमे ना मिले,
तेरे हृदय में घनश्याम,
मैं श्यामा की लाडली।
श्यामा जमुना तट पर मैं फिरी,
मुझे कहीं ना मिले घनश्याम,
मैं श्यामा की लाडली।
राधा यमुना घूमे ना मिले,
तेरे हृदय में घनश्याम,
मैं श्यामा की लाडली।
श्यामा ताल तालों मैं फिरी,
मुझे कहीं ना मिले घनश्याम,
मैं श्यामा की लाडली।
सखी तालों में घूमे ना मिले,
तेरे हृदय में घनश्याम,
मैं श्यामा की लाडली।
श्यामा मंदिर मंदिर मैं फिरी,
मुझे कहीं ना मिले घनश्याम,
मैं श्यामा की लाडली।
रुक्मण मंदिर घूमे ना मिले,
तेरे हृदय में घनश्याम,
मैं श्यामा की लाडली।
गुरु पूर्णिमा स्पेशल।MERE SARE PAR CHUNDARI GYAN KI M SATGURU KI LADLI
श्यामा की लाडली जैसे बोलती है, उसके सर पर ज्ञान की चुनरी है, दिन–रात उसी में लिपटी रहती है। वह मधुबन, जमुना तट, ताल, मंदिर सब तरफ घूमती है, घनश्याम को दूर दूर तलाशती है। मीरा, राधा, रुक्मणी भी उसी तरह घूमते हैं, लेकिन जब हृदय में झाँकते हैं तो वही घनश्याम बसा रहता है। जय श्री कृष्ण जी। जय श्री श्यामा जी।
खोज–खोज कर बाहर भटकने से पहले ही दिल में बसा श्याम दिखाई देता है। जैसे लाडली चारों ओर ढूँढती है, फिर पाती है वही जो अपने भीतर था। यही बात भक्त को भी सिखाती है कि जहाँ घूम–घूम कर तलाश हो, वहीं अपने भीतर शांति और प्रेम का आश्रय बसा है। इश्वर का आशर्वाद हम सब पर बना रहे, यह लाडली वाला प्यार दिल को हमेशा गुदगुदाता रहे। जय श्री कृष्ण जी। जय श्री श्यामा जी।
खोज–खोज कर बाहर भटकने से पहले ही दिल में बसा श्याम दिखाई देता है। जैसे लाडली चारों ओर ढूँढती है, फिर पाती है वही जो अपने भीतर था। यही बात भक्त को भी सिखाती है कि जहाँ घूम–घूम कर तलाश हो, वहीं अपने भीतर शांति और प्रेम का आश्रय बसा है। इश्वर का आशर्वाद हम सब पर बना रहे, यह लाडली वाला प्यार दिल को हमेशा गुदगुदाता रहे। जय श्री कृष्ण जी। जय श्री श्यामा जी।
☛ Video Name: लाडली श्यामा जू रख लो मुझे बरसाने में
☛ Voice: बृज रस अनुरागी पूनम दीदी (Sadhvi Purnima Ji)
☛ Voice: बृज रस अनुरागी पूनम दीदी (Sadhvi Purnima Ji)