मेरी रूठ रही कालका मनाऊं कैसे भजन

मेरी रूठ रही कालका मनाऊं कैसे भजन

मेरी रूठ रही कालका,
मनाऊं कैसे,
मंदिर जली रोशनी,
बुझाऊं कैसे,
मेरी रूठ रही कालका,
मनाऊं कैसे।

आसपास या को मंदिर नहीं है,
दूर कलकत्ता में जाऊं कैसे,
मेरी रूठ रही कालका मनाऊं कैसे,
मंदिर जली रोशनी बुझाओ कैसे,
मेरी रूठ रही कालका मनाऊं कैसे।

ताता ताता पानी भरी रे बाल्टी,
नहावे नहीं कालका नहलाऊं कैसे,
मेरी रूठ रही कालका मनाऊं कैसे,
मंदिर जली रोशनी बुझाओ कैसे,
मेरी रूठ रही कालका मनाऊं कैसे।

पांच रंग चुनरिया इसे नहीं भावे,
काली काली साड़ी मैं लाऊं कहां से,
मेरी रूठ रही कालका मनाऊं कैसे,
मंदिर जली रोशनी बुझाओ कैसे,
मेरी रूठ रही कालका मनाऊं कैसे।

मोतियन माला इसे नहीं भावे,
मुंडो की माला मैं लाऊं कहां से,
मेरी रूठ रही कालका मनाऊं कैसे,
मंदिर जली रोशनी बुझाओ कैसे,
मेरी रूठ रही कालका मनाऊं कैसे।

लाल लाल मेहंदी इसे नहीं भावे,
भाल तलवार मैं लाऊं कहां से
मेरी रूठ रही कालका मनाऊं कैसे,
मंदिर जली रोशनी बुझाओ कैसे,
मेरी रूठ रही कालका मनाऊं कैसे।

बजनी पायल इसे नहीं भाव में,
मोटे मोटे घुंघरू मैं लाऊं कहां से,
मेरी रूठ रही कालका मनाऊं कैसे,
मंदिर जली रोशनी बुझाओ कैसे,
मेरी रूठ रही कालका मनाऊं कैसे।

मेवा मिष्ठान इसे नहीं भावे,
खप्पर मैं लाऊं कहां से,
मेरी रूठ रही कालका मनाऊं कैसे,
मंदिर जली रोशनी बुझाओ कैसे,
मेरी रूठ रही कालका मनाऊं कैसे।


|| मेरी रूठ रही कालका मनाऊ कैसे || MERI RUTH RAHI KALKA MANAU KESE || # NAVRATRESONG #MATABHAJAN 

कालका की रूठ ऐसी लगती है जैसे घर की ही माँ ने बस इतना कहा हो कि “तुम मेरी बात भी नहीं सुनते, दरबार भी दूर है, मंदिर की रोशनी तो जलती रहे, मैं भी अपने बिना तुम्हारा जीवन अधूरा हो जाए।” आस‑पास मंदिर न हो, कलकत्ता जैसे दूरधाम तक पहुँचना संभव न हो, फिर भी दिल यही चाहता है कि माँ को फिर से खुश करें, मंदिर की जलती रोशनी को बुझा कर नया दीपक जलाएं, जैसे एक नई उम्मीद से घर को रोशन कर देना चाहते हों।

ये बातें भी खटकती हैं कि कालका को नहलाने के लिए ताता पानी भरी बाल्टी कहाँ से लाएँ, उन्हें पसंद आने वाली पाँच रंग की चुनरियाँ, काली‑काली साड़ी, मोतियों की माला, मुंडो की माला, लाल मेहंदी, भाल‑तलवार, घने घुंघरू, खप्पर—सब कुछ जो माँ को भावे, वह सामने नहीं है। तब दिल अपने आप समझाता है कि माँ को मनाने के लिए दूर‑दूर तक जाना ज़रूरी नहीं, न ही महँगे उपहार। बस एक सच्ची याद, एक छोटी सी आरती, और यह भाव कि जो भी कर पा रहे हैं, वही माँ के सामने चढ़ ही जाता है। इसी भाव से दिल शांत हो जाता है और लगने लगता है कि कालका की रूठी हुई मुस्कान धीरे‑धीरे फिर से खुलने लगेगी। आप सभी पर इश्वर की कृपा बनी रहे। जय श्री कालका माँ जी की। 

Song : Meri Ruth Gayi Kali Manau Kaise
Singer : Rashmi Yogini 
Music : Maa Ambe Bhakti
Artist :- Maithili Jha
Editor :- Deepanshi Gupta
Label : Maa Ambe Bhakti 

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