कान पकड़कर मेरा मैया सही रस्ते पे लाना भजन
कान पकड़कर मेरा मैया सही रस्ते पे लाना भजन
कान पकड़कर मेरा मैया, सही रस्ते पे लाना।
हम तेरे ही बालक हैं, तू डाँट ये मुझे लगाना॥
भटकूँ जब भी इधर-उधर, मैं तू ही ध्यान ये रखना माँ।
थाम के तेरी उँगली को, मैं गोदी में सर रख लूँ माँ।
एक तेरा भरोसा मुझको, तू छोड़ कभी ना जाना॥
कान पकड़कर मेरा मैया, सही रस्ते पे लाना।
हम तेरे ही बालक हैं, तू डाँट ये मुझे लगाना॥
माँ का आँचल मिला है मुझको, पिता के जैसे साथ दिया।
जब-जब आफत आई है, माँ ने उसको थाम लिया।
एक आँसू के बदले में, तू सागर ये बन जाना॥
कान पकड़कर मेरा मैया, सही रस्ते पे लाना।
हम तेरे ही बालक हैं, तू डाँट ये मुझे लगाना॥
साथी बनकर साथ दिया है, हरदम साथ ये चलती है।
बिन कुछ कहे, ये मैया मेरी, इतनी कृपा ये करती है।
लकी पे दया तुम्हारी, तुम उसको गले लगाना॥
कान पकड़कर मेरा मैया, सही रस्ते पे लाना।
हम तेरे ही बालक हैं, तू डाँट ये मुझे लगाना॥
हम तेरे ही बालक हैं, तू डाँट ये मुझे लगाना॥
भटकूँ जब भी इधर-उधर, मैं तू ही ध्यान ये रखना माँ।
थाम के तेरी उँगली को, मैं गोदी में सर रख लूँ माँ।
एक तेरा भरोसा मुझको, तू छोड़ कभी ना जाना॥
कान पकड़कर मेरा मैया, सही रस्ते पे लाना।
हम तेरे ही बालक हैं, तू डाँट ये मुझे लगाना॥
माँ का आँचल मिला है मुझको, पिता के जैसे साथ दिया।
जब-जब आफत आई है, माँ ने उसको थाम लिया।
एक आँसू के बदले में, तू सागर ये बन जाना॥
कान पकड़कर मेरा मैया, सही रस्ते पे लाना।
हम तेरे ही बालक हैं, तू डाँट ये मुझे लगाना॥
साथी बनकर साथ दिया है, हरदम साथ ये चलती है।
बिन कुछ कहे, ये मैया मेरी, इतनी कृपा ये करती है।
लकी पे दया तुम्हारी, तुम उसको गले लगाना॥
कान पकड़कर मेरा मैया, सही रस्ते पे लाना।
हम तेरे ही बालक हैं, तू डाँट ये मुझे लगाना॥
Jubin Nautiyal: Main Balak Tu Mata | Hindi Lyrics | मैं बालक तु माता Gulshan Kumar | gaana Lyrics
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Song: Main Balak Tu Mata
Singer: Jubin Nautiyal Lyrics: Manoj Muntashir
Music: Manan Bhardwaj Label: T-Series
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Music: Manan Bhardwaj Label: T-Series
तो क्या जो ये पीड़ा का पर्वत, रास्ता रोके खड़ा है,तेरी नरम धड़कन में बचपन की हर चोरी-छुपी मासूमियत सुरक्षित रहती है; तेरे हाथ की पकड़ जैसे जीवन का सही मार्ग दिखाने वाला दीपक हो जो भटकन की रातों को रोशन कर दे। तेरे स्नेहिल डाँट में दंड नहीं, पर वापस आई हुई चाहत और सुधरने की मीठी प्रेरणा बसती है; मैं उसी की उष्मा में मुरझाये हुए पथ को फिर से सीधा पाता हूँ। तेरी गोदी में सर रखकर मिलती शांति जीवन के भारी बोलों को हल्का कर देती है, और तेरे भरोसे की वह आवाज़ भीतर से उठती हिम्मत बन जाती है जो कभी नहीं छूटनी चाहिए। तेरे आँचल का सहारा हर आँसू को समुंदर बना देता है—दुःख के कण भी दया के बहाव में पिघल जाते हैं। तू संग चलती है तो अकेलापन साथी में बदल जाता है; तेरी भाषाहीन करुणा बिना शर्त अपनाने का वादा करती है, और हर बार जब राह कठिन हो, तेरी माँ-सी ममत्वपूर्ण मौजूदगी ने जीवन को फिर से खड़ा कर दिया है।
तेरी ममता जिसका बल, वो कब दुनिया से डरा है।
हिम्मत में क्यों हारूँ मैया,
हिम्मत में क्यों हारूँ मैया,
सर पे हाथ तेरा है॥
तेरी लगन में मगन मैं नाचूँ,
गाऊँ तेरा जगराता।
मैं बालक, तू माता शेरांवालिये,
है अटूट यह नाता शेरांवालिये॥
हो ओ,
हो मैं बालक, तू माता शेरांवालिये,
है अटूट यह नाता शेरांवालिये॥
शेरांवालिये माँ,
पहाड़ांवालिये माँ,
जोतांवालिये माँ,
मेहरांवालिये माँ॥
मैं बालक, तू माता शेरांवालिये,
है अटूट यह नाता शेरांवालिये॥
बिन बाती, बिन दिया,
तू कैसे काटे घोर अँधेरा।
बिन सूरज,
तू कैसे कर दे अंतर्मन में सवेरा॥
बिन धागों के कैसे जुड़ा है,
बिन धागों के कैसे जुड़ा है,
बंधन तेरा मेरा।
तू समझे या मैं समझूँ,
कोई और समझ नहीं पाता॥
मैं बालक, तू माता शेरांवालिये,
है अटूट यह नाता शेरांवालिये॥
शेरांवालिये माँ,
पहाड़ांवालिये माँ,
जोतांवालिये माँ,
मेहरांवालिये माँ॥
मैं बालक, तू माता शेरांवालिये,
है अटूट यह नाता शेरांवालिये॥
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Author - Saroj Jangir
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