शिव शंकर की करती मैं भक्ति शिव भजन

शिव शंकर की करती मैं भक्ति शिव भजन

शिव शंकर की करती मैं भक्ति,
उनसे मिलती मुझको शक्ति
मुक्ति के स्वामी मेरे शंकर,
अंतर्यामी है विश्वेश्वर,
अंतर्यामी है विश्वेश्वर।

ऐसा कोई दिन ना आए,
जिस दिन शिव गुणगान ना गाए,
शिवजी की छवि को मैंने,
मन मंदिर में बसाई,
प्यासी दासी बन के बाबा,
तेरे दर पे आई।

शिव शंकर की करती मैं भक्ति,
उनसे मिलती मुझको शक्ति
मुक्ति के स्वामी मेरे शंकर,
अंतर्यामी है विश्वेश्वर,
अंतर्यामी है विश्वेश्वर।

सुन ले मेरी अब तो अर्जी,
डमरू वाले मेरे शिव जी,
सब कुछ मुझे मिला है बाबा,
आप की कृपा से,
दर्शन देके भोले बाबा,
मुझको धन्य कर दो।

शिव शंकर की करती मैं भक्ति,
उनसे मिलती मुझको शक्ति
मुक्ति के स्वामी मेरे शंकर,
अंतर्यामी है विश्वेश्वर,
अंतर्यामी है विश्वेश्वर।


Shiv Shankar ki Karti Mai Bhakti | Shiv ji ke Bhajan | Popular Bholenath Songs 

Shiva performs several roles as a Hindu deity. He is the great ascetic, the master of fertility, the master of poison and medicine, and Lord of Cattle. His combined roles are exemplary of a tendency in Hinduism to see complementary qualities in a single ambiguous figure.

भक्ति में डूब जाएं तो शक्ति मिलने लगती है, मुक्ति के स्वामी अंतर्यामी विश्वेश्वर सब संभाल लेते हैं। ऐसा दिन न आए जब गुणगान न हो, मन मंदिर में छवि बसा लें, प्यासी दासी बनकर दर पर पहुंचें। इश्वर का आशीर्वाद हर कमी दूर कर देता है। अर्जी सुन लें डमरू वाले शिव जी, कृपा से सब मिल गया, दर्शन से धन्य हो जाएं। भोले बाबा हर पुकार थाम लेते हैं। आप सभी पर इश्वर की कृपा बनी रहे। जय श्री शंकर जी की। 

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