निर्भय होय हरि रा गुण गाया भजन

निर्भय होय हरि रा गुण गाया देसी भजन

मोह पण काचा,
म्हारा सतगुरु जी साचा,
भे कृपा जब,
संतों में लिया वास,
निर्भय होय हरि रा गुण गाए,
ज्यारे बेल आलमराजा आया,
जब म्हारी बेल निष्कलंक धणी आया।।

अनेक संतों रे में तो,
शरणों में आया,
गुरु जी आगे,
शीश नमाया,
निर्भय होय हरि रा गुण गाए,
ज्यारे बेल आलमराजा आया,
जब म्हारी बेल निष्कलंक धणी आया।।

प्रेम रा प्याला म्हाने,
सतगुरु जी पाया,
जन्म मरण का,
बंधन छोड़ाया,
निर्भय होय हरि रा गुण गाए,
ज्यारे बेल आलमराजा आया,
जब म्हारी बेल निष्कलंक धणी आया।।

धाय जाके,
अमरफल पाया,
ध्रुव अचल ने,
अखी ठहराया,
निर्भय होय हरि रा गुण गाए,
ज्यारे बेल आलमराजा आया,
जब म्हारी बेल निष्कलंक धणी आया।।

दयानाथ गुरु जी,
पूरा पाया,
बोला प्राग स्वामी,
शरणों में आया,
निर्भय होय हरि रा गुण गाए,
ज्यारे बेल आलमराजा आया,
जब म्हारी बेल निष्कलंक धणी आया।।

मोह पण काचा,
म्हारा सतगुरु जी साचा,
भे कृपा जब,
संतों में लिया वास,
निर्भय होय हरि रा गुण गाए,
ज्यारे बेल आलमराजा आया,
जब म्हारी बेल निष्कलंक धणी आया।।



निर्भय होय हरि रा गुण गाया, ज्योरी ज्योरी बेल निकलंक राजा आया 🚩

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Saroj Jangir Author Admin - Saroj Jangir

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