घर घर में बस रहा है मेरा श्याम खाटू

घर घर में बस रहा है मेरा श्याम खाटू

घर घर में बस रहा है,
मेरा श्याम खाटू वाला,
मेरा श्याम खाटू वाला,
मेरा श्याम लीले वाला,
लीला है इसकी न्यारी,
हारे का है सहारा,
घर घर में बस रहा है,
मेरा श्याम खाटू वाला।

जो हार कर है आया,
उसको दिया सहारा,
मैं भी हार गया हूं,
मुझको भी दो सहारा,
घर घर में बस रहा है,
मेरा श्याम खाटू वाला।

तेरी एक झलक को बाबा,
हम सब ही हैं तरसते,
उस एक झलक ने बाबा,
मेरी जिंदगी को तारा,
घर घर में बस रहा है,
मेरा श्याम खाटू वाला।

मोह माया के जगत में,
उलझा हुआ हूं बाबा,
मुझे चरणों से लगा लो,
मेरा श्याम मुरली वाला,
घर घर में बस रहा है,
मेरा श्याम खाटू वाला।

खाटू में जो भी आया,
उसे रास्ता दिखाया,
तेरे खाटू की यह माटी,
गाये तेरा फसाना,
घर घर में बस रहा है,
मेरा श्याम खाटू वाला।

घर घर में बस रहा है,
मेरा श्याम खाटू वाला,
मेरा श्याम खाटू वाला,
मेरा श्याम लीले वाला,
लीला है इसकी न्यारी,
हारे का है सहारा,
घर घर में बस रहा है,
मेरा श्याम खाटू वाला।



घर घर में बस रहा है मेरा श्याम खाटू वाला ग़ज़ल

Next Post Previous Post