साखी – मारग कठिन कबीर का ,धर न सके पग कोई। आई चले कोई सुरमा, जाके धड़ पर सीस ना होय रण जंग बाजा बाजिया, और सुरा आए धाय सुरा सो सुरा लड़े, और कायर भागे जय ।
भजन – कोई मत छेड़ो रे यार तुम दूर खड़े रहो रे में तो दीवाना नाम का मुझे कोई मत छेड़ो रे।
हाथी के इंसाफ से ,मेने बाघ को घेरा रे। उसी को फिरता ढूंढता मैं, बन बन पुकारु रे।
Kabir Bhajan Lyrics in Hindi
में तो दीवाना नाम का.....।
मेरा घर तो झाड़ लिया, ओरण का झाड़ू रे। जो कोई आता मुझे पूछता, मैं उसकी को तारु रे। में तो दीवाना नाम का.....।
पुरन प्याला प्रेम का,यह अगम से आया रे। भर पिया कबीर ने रे, कमाल को पाया रे । में तो दीवाना नाम का....।
कोई मत छेड़ो रे | Koi mat chhedo re | Geeta Parag Kabir ||