मन वच और काया से क्षमा याचना कर लेना

मन वच और काया से क्षमा याचना कर लेना


मन वच और काया से,
क्षमा याचना कर लेना,
वैर भाव जो मन में हो,
उसे दिल मिटा देना।

संवत्सरी का शुभ दिन,
नई रोशनी लाया है,
वैर भाव की गाँठों को,
सुलझाने आया है,
ये समय बड़ा अनमोल,
ना व्यर्थ गंवा देना,
वैर भाव जो मन में हो,
उसे दिल मिटा देना।

वाणी में संयम हो,
शब्दों में होवे मिठास,
कटु शब्द न आवे कभी,
स्वप्न में भी हमारे पास,
यही प्रार्थना है भगवान,
मेरी विनती सुन लेना,
वैर भाव जो मन में हो,
उसे दिल मिटा देना।

जाने अनजाने में,
दिल किसी का दुखाया हो,
हो चाहे वो अपना,
या कोई पराया हो,
क्षमा वाणी बनकर के,
क्षमा खामणा कर लेना,
वैर भाव जो मन में हो,
उसे दिल मिटा देना।

मन वच और काया से,
क्षमा याचना कर लेना,
वैर भाव जो मन में हो,
उसे दिल मिटा देना,
शुद्ध भावों से दिलबर,
यह पर्व मना लेना।



SHMAPNA # मिच्छामि दुखड़म्म

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SHREE JIN MONOGY SURI JI M. S. K CHARO
MEA VANDANA
PRARNA - MUNI NAYGY SAGER M.S.
TITEL - SHAMAPNA MICVHAMI DUKHDAM
SINGER - DILIP SINGH SISODIYA DILBAR
CO . SINGER - MAHESH CHANDRWAT
RANJEET
WRITER - DILIP SINGH SISODIYA DILBAR
PRAJANT -. DILBAR GROUP NAGDA
CON . 9907023365 ,8770599488
 
Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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