नाभि नदंन नाथ केशरिया करे श्रृंगार भजन
नाभि नदंन नाथ केशरिया करे श्रृंगार भजन
नाभि नंदन नाथ केशरिया,
करे श्रृंगार तेरा सवेरे सवेरे,
अभिषेक करके,
केशर फूल पूजा,
अंगिया रचाए सवेरे सवेरे।।
धूप पूजा करके कुमति को टाले,
दीपक पूजा से दिव्य ज्योत जगाले,
दर्शन ज्ञान चरित्र सिद्धशिला से,
करे अक्षत पूजा सवेरे सवेरे।।
छप्पन भोग बनाकर नैवेद्य चढ़ाए,
फल पूजा से मोक्ष फल हम पाए,
अष्ट प्रकार की पूजा करेंगे प्रभु की आओ,
हम सब मिलकर सवेरे सवेरे।।
श्रृंगार तेरा मेरे मन को लुभाता है,
नैनों के रास्ते तू दिल में समाता है,
नरसा यूं कहता दिलबर,
करो प्रभु दर्शन सवेरे सवेरे।।
नाभि नंदन नाथ केशरिया,
करे श्रृंगार तेरा सवेरे सवेरे,
अभिषेक करके,
केशर फूल पूजा,
अंगिया रचाए सवेरे सवेरे।।
करे श्रृंगार तेरा सवेरे सवेरे,
अभिषेक करके,
केशर फूल पूजा,
अंगिया रचाए सवेरे सवेरे।।
धूप पूजा करके कुमति को टाले,
दीपक पूजा से दिव्य ज्योत जगाले,
दर्शन ज्ञान चरित्र सिद्धशिला से,
करे अक्षत पूजा सवेरे सवेरे।।
छप्पन भोग बनाकर नैवेद्य चढ़ाए,
फल पूजा से मोक्ष फल हम पाए,
अष्ट प्रकार की पूजा करेंगे प्रभु की आओ,
हम सब मिलकर सवेरे सवेरे।।
श्रृंगार तेरा मेरे मन को लुभाता है,
नैनों के रास्ते तू दिल में समाता है,
नरसा यूं कहता दिलबर,
करो प्रभु दर्शन सवेरे सवेरे।।
नाभि नंदन नाथ केशरिया,
करे श्रृंगार तेरा सवेरे सवेरे,
अभिषेक करके,
केशर फूल पूजा,
अंगिया रचाए सवेरे सवेरे।।
शुक्रिया केसरिया नाथ | Shukriya Keshariya Nath | Kapil Pasari | Latest Bhajan 2026 | Jai Keshariya
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सुबह की पहली किरण के साथ जब नाभि नंदन नाथ केशरिया का श्रृंगार शुरू होता है, तो मन जैसे किसी दिव्य सुगंध में डूब जाता है। अभिषेक की ठंडी धारा से शरीर शुद्ध होता है, केसर और फूलों की माला चढ़ती है, अंगिया रचाई जाती है – हर कदम में प्रेम की वो मिठास घुल जाती है जो सारे दिन को रोशन कर देती है। धूप की महक कुमति को दूर भगाती है, दीपक की ज्योति मन में दिव्य प्रकाश जगा देती है। सिद्धशिला से दर्शन का ज्ञान और चरित्र मिलता है, अक्षत चढ़ाकर वो आशीर्वाद माँगा जाता है जो जीवन को सच्चाई की ओर ले जाता है।
छप्पन भोग सजाए जाते हैं, नैवेद्य चढ़ाया जाता है, फल पूजा से मोक्ष का फल मिलने की उम्मीद जगती है। अष्ट प्रकार की पूजा में सब मिलकर प्रभु की आराधना करते हैं, जैसे एक परिवार हो जो सुबह-सुबह ही एक साथ बैठकर उनके चरणों में सिर नवाता है। श्रृंगार देखते ही मन लुभा जाता है, नेनों के रास्ते से वो दिल में उतर आता है। नरसा और दिलबर की तरह पुकार निकलती है – प्रभु, दर्शन दो, सुबह-सुबह ही दर्शन दो। हर पूजा का एक ही मकसद रहता है – वो प्रेम जो केसरिया तीर्थ में बसता है, वो प्रेम जो हर सवेरे को अमृत बना देता है।
🎤 Singer: Kapil Pasari
✍ Lyrics: Dilber Ji
🎵 Music: Narendra Singh
✍ Lyrics: Dilber Ji
🎵 Music: Narendra Singh
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