आजा मां मैं तो कब से खड़ा हूं तेरे द्वार

आजा मां मैं तो कब से खड़ा हूं तेरे द्वार

आजा मां मैं तो,
कब से खड़ा हूं तेरे द्वार,
के अखियां,
तड़पत है दिन रात।

स्वर संगीत की तु है माता,
तेरी दया से दास है गाता,
कंठ विराजो मेरे माता,
तेरी दया से मान मैं पाऊं,
चरण शरण में हर दम गाउं,
हाथ जोड़ तुझे शीश झुकाऊ।

रहमत तेरी ऐसे बरसे,
दिल मेरा मां जैसे तरसे,
जाऊ कभी न खाली दर से,
सुर नर मिल गंदर्ब ध्याये,
सिमर सभा में मान वो पाए,
दास रंगीला हर दम गाए,
आजा मां मैं तो,
कब से खड़ा हूं तेरे द्वार,
के अखियां,
तड़पत है दिन रात।



Maa Main Khada Dwar Tere
Next Post Previous Post