आजा मां मैं तो कब से खड़ा हूं तेरे द्वार भजन

आजा मां मैं तो कब से खड़ा हूं तेरे द्वार भजन

आजा मां मैं तो,
कब से खड़ा हूं तेरे द्वार,
के अखियां,
तड़पत है दिन रात।

स्वर संगीत की तु है माता,
तेरी दया से दास है गाता,
कंठ विराजो मेरे माता,
तेरी दया से मान मैं पाऊं,
चरण शरण में हर दम गाउं,
हाथ जोड़ तुझे शीश झुकाऊ।

रहमत तेरी ऐसे बरसे,
दिल मेरा मां जैसे तरसे,
जाऊ कभी न खाली दर से,
सुर नर मिल गंदर्ब ध्याये,
सिमर सभा में मान वो पाए,
दास रंगीला हर दम गाए,
आजा मां मैं तो,
कब से खड़ा हूं तेरे द्वार,
के अखियां,
तड़पत है दिन रात।


Maa Main Khada Dwar Tere

मां के द्वार पर खड़े होकर आंखें दिन-रात तड़पती रहती हैं। जैसे कोई बच्चा मां को पुकारता है, वैसे ही मन बार-बार कहता है – आजा मां, अब तो आ जा। स्वर और संगीत की माता, तेरी दया से ही गाने की आवाज निकलती है। कंठ में विराज जा मां, ताकि तेरी कृपा से मान मिले और चरणों की शरण में हर दम गाता रहूं। हाथ जोड़कर शीश झुकाता हूं।
तेरी रहमत जब बरसती है तो दिल तरसने लगता है। दर से कभी खाली हाथ नहीं लौटना चाहता। सुर, नर, गंधर्व सब तेरी याद में डूबे रहते हैं। सिमर-सिमर कर सभा में मान पाते हैं। दास रंगीला हर पल तेरे नाम में रमा रहता है। मां की कृपा मिलते ही जीवन में एक अनोखी मिठास आ जाती है। गाने की चाह पूरी हो जाती है, मन शांत हो जाता है और हर सांस में बस उनकी याद बस जाती है। आप सभी पर इश्वर की कृपा बनी रहे। जय श्री माता रानी जी की। 

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