या सौतन भंगिया ने बहना मेरे बलम भजन
या सौतन भंगिया ने बहना मेरे बलम भजन
या सौतन भंगिया ने बहना,मेरे बलम बहकाए,
मैंने देखे ना बाग बगीचे,
हां बाग बगीचे,
याने जंगल घूमाऐ,
प्यारे बलम बहकाए।
मैंने कभी बनाई ना रोटी,
बनाई ना रोटी,
याने घोटा लगबाए,
प्यारे बलम बहकाए।
मैं तो थी महलों की रानी,
महलों की रानी,
या के कुटिया भी ना पाए,
प्यारे बलम बहकाए।
मैं तो सोती थी गद्दा पर,
सोती थी पलका पर,
याकै खटिया भी ना पाए,
प्यारे बलम बहकाए।
पीते थे भांग के प्याले,
भर भर के प्यार,
फिर नशा चढ़ जाए,
प्यारे बलम बहकाए।
दिल तो लगा है तुमसे,
लगा भूले तुमसे,
अब सहा भी ना जाए,
प्यारे बलम बहकाए।
YA SAUTAN BHANGIYA NE BEHNA MERE BALAM BEHKAYE ।।या सौतन भंगिया ने बहना मेरे बलम बहकाए
SINGER : SUMAN SHARMA
प्यार में पड़कर इंसान कितना कुछ सह लेता है। महलों की रानी थी, गद्दों-पलंगों पर सोती थी, लेकिन अब जंगल घूमना, घोटा लगाना, कुटिया में रहना भी गवारा हो गया। बलम ने बहका दिया तो सारा आराम छूट गया। फिर भी दिल नहीं मानता। भांग के प्याले भर-भरकर पीते हैं, नशा चढ़ जाता है, फिर भी साथ नहीं छोड़ पाती। प्यार का यह रंग ऐसा है कि अच्छा-बुरा सब भूल जाता है। अब तो सहा भी नहीं जाता, लेकिन बलम से लगाव टूटता नहीं। दिल में बस यही भाव रह जाता है कि चाहे कितना भी कष्ट हो, प्यारे के साथ हर हाल में रहना है। प्यार की यह दीवानगी ही जीवन को रंगीन बना देती है।
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