अवध में राम पधारे हैं श्रीराम भजन

अवध में राम पधारे हैं श्रीराम भजन

मेरे भाग्य जगे मेरे पुण्य फले,
जन जन के राजदुलारे हैं,
अवध में राम पधारे हैं।

मैं अपना आंगन बुहारूंगी,
लल्ला की राह निहारूंगी,
मेरे अंगना आकर खेलेंगे,
मैं उनकी नजर उतारूंगी।

मैं देखूंगी रघुनन्दन को,
वो पल पल मुझे निहारे हैं,
वो पल पल मुझे निहारे हैं,
अवध में राम पधारे हैं।

मैं छप्पन भोग बनाऊंगी,
लल्ला को संग खिलाऊंगी,
वो जग का पालन करते हैं,
मैं उनको भोग लगाऊंगी,
मेरे राम जगत के स्वामी हैं,
मेरे भी पालनहारे हैं,
मेरे भी पालनहारे हैं,
अवध में राम पधारे हैं।

मेरे राम ज्ञान की ज्योति हैं,
ये जगत सीप वो मोती हैं,
उसको सब कुछ मिल जाता है,
जहां कृपा राम की होती है,
हम निर्धन जन उनको क्या दें,
जो सबके भाग्य संवारे हैं,
अवध में राम पधारे हैं।

मेरे भाग्य जगे मेरे पुण्य फले,
जन जन के राजदुलारे हैं,
अवध में राम पधारे हैं।
 

Awadh Mein Ram Padhare Hain | Pooja Tiwari | Navjot Godara | Tejas Chavan | Shri Ram Bhajan

निर्माता - नवजोत गोदारा.
 बोल - जितेंद्र शर्मा.
गायिका - पूजा तिवारी.
संगीतकार - तेजस चव्हाण.
सहायक गायक - ऋतुजा वानखडे, गणेश शीलवंत, खुशी देवकते, तेजस चव्हाण.
बांसुरी - निलेश देशपांडे.
 
जब राम अवध में पधारते हैं, तो हर घर का आंगन जैसे फूलों से भर जाता है। भाग्य जागते हैं, पुराने पुण्य फलते हैं, और हर तरफ़ खुशी की लहर दौड़ जाती है। जन-जन के राजदुलारे आ गए हैं, तो अब आँगन बुहारने का मन करता है। लल्ला की राह निहारते हुए इंतज़ार है कि वो आएँगे, मेरे आँगन में खेलेंगे, और मैं उनकी नजर उतारूँगी। वो पल-पल निहारते हैं, और आँखें भर आती हैं उस ममता से जो दुनिया को थामे हुए है।
छप्पन भोग सजाए जाते हैं, खुद साथ बैठकर खिलाने की चाहत है। वो जग के पालनहार हैं, फिर भी मेरे भी पालनहार हैं। ज्ञान की ज्योति हैं, सीप में छिपे मोती जैसे हैं। उनकी कृपा जहाँ पड़ती है, वहाँ सब कुछ मिल जाता है। हम निर्धन क्या दें उन्हें, जो सबके भाग्य संवारते हैं। बस दिल से पुकार है कि अवध में राम पधारे हैं, और ये जीवन भी उनका हो गया है। 
 
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