वृन्दावन में आऊँ मोहन ये अरदास हमारी भजन

वृन्दावन में आऊँ मोहन ये अरदास हमारी भजन


वृन्दावन में आऊँ मोहन,
ये अरदास हमारी,
मेरे बाँके बिहारी,
सुन लो अर्ज हमारी।।

तेरे नाम की महिमा गाऊँ,
तेरी ज्योत जलाऊँ,
साँझ-सवेरे राधे कृष्ण,
रटना मैं तो लगाऊँ,
शरण तुम्हारी पड़ा हूँ, मोहन,
राखो लाज हमारी,
मेरे बाँके बिहारी,
सुन लो अर्ज हमारी।।

तेरी कृपा से, गिरधर, मेरी
नैया चलती जाए,
चाहे जैसी आए मुसीबत,
पल में हल हो जाए,
कृष्ण नाम मैं गाऊँ, मोहन,
भर दो झोली खाली,
मेरे बाँके बिहारी,
सुन लो अर्ज हमारी।।

साँवली सूरत, छवि तुम्हारी,
मेरे मन को भाए,
बाँके बिहारी, देख के तुमको,
मेरा मन हरसाए,
दर्शन दे दो, मुरली बजैया,
जाऊँ मैं बलिहारी,
मेरे बाँके बिहारी,
सुन लो अर्ज हमारी।।

वृन्दावन में आऊँ मोहन,
ये अरदास हमारी,
मेरे बाँके बिहारी,
सुन लो अर्ज हमारी।।


वृंदावन में आऊँ मोहन~ vrindavan Mein Aau Mohan ye ardas hamari~krishan bhajan ~bankebihari bhajan

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तेरे नाम की गूँज जब भीतर उठती है तो वृंदावन की हर राह मेरे भीतर खुल जाती है; साँझ-सवेरे राधे कृष्णा की जपती लय में मेरी साँसें खुद को पा लेती हैं और निर्झर-सी शांति हर घाव मिटा देती है। मुरली की वह मीठी खनक आँखों के सामने नाचती तस्वीर बनकर उतर आती है, और साँवली सूरत में बाँके बिहारी का अंश इतना पास लगता है कि दिल बस उसी के चरणों की चाह में थिरकता रह जाता है। नाव चलाने वाले का हाथ महसूस होते ही जीवन की तूफानी लहरें ढिलाई ले लेती हैं; जो भी बाधा आए, नाम की एक धुन में वह क्षण भर में हल हो जाती है। भक्ति की झोली खाली न रहने पाये—बस उसी खोलने की ख्वाहिश से हर शब्द निकल आता है, और मिलने की आस ऐसे गले लगती है जैसे घर की लौटा हुई रोशनी। 
 
वृंदावन की मिट्टी, मुरली का स्वर, और तेरी कृपा—इन तीनों में गूँथ कर जीवन का हर संकट पार हो जाए। जय बाँके बिहारी, जय कृष्ण। वृंदावन की पावन धूल में जीवन का सच्चा सुख और आत्मा की शांति बसती है। हृदय में बस यही अभिलाषा रहती है कि हर पल श्रीकृष्ण के चरणों का स्मरण बना रहे और उनके प्रेममय धाम में पहुँचकर जीवन धन्य हो जाए। संसार की कठिनाइयाँ चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हों, उनका नाम मन में अटूट विश्वास जगाता है और हर चिंता धीरे-धीरे समाप्त होने लगती है। उनके प्रति प्रेम इतना गहरा होता है कि सुबह-शाम हर श्वास में केवल राधे-कृष्ण का नाम ही गूंजता है। उनकी कृपा जीवन रूपी नैया को सुरक्षित किनारे तक पहुँचाने वाली शक्ति बन जाती है। मन में यही विनम्र प्रार्थना उठती है कि उनकी करुणा कभी दूर न हो और उनका स्नेह सदा बना रहे। उनकी सांवली, मनमोहक छवि का स्मरण होते ही मन आनंद और भक्ति से भर उठता है। एक बार उनके दिव्य दर्शन मिल जाएँ तो जीवन की हर कमी पूर्ण हो जाए और हृदय सदा उनके चरणों में समर्पित रहे।
 
song- vrindavan mein aau mohan
singer - Brajbihari sharma
Lyrics - Brajbihari sharma
music - krishna studio
video editing - Raghav sharma
channal - Bhajan notes channal
Label - Bhajan notes 
 
Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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