साधो भाई अपणी आप लखेलो देसी भजन

साधो भाई अपणी आप लखेलो देसी भजन

साधो भाई अपणी आप लखेलो,
अपणी बात आप ही जाणे,
ना घटे ना बधेलो,
ना कोई बंध मुक्त का फंदा,
ना मिल्यो बिसरेलो,
पांच क्लेश लेश नी जिसमें,
ना गुरु ना चेलो,
साधो भाई अपणी आप लखेलो।।

दस इंद्री मन बुद्धि न जाणे,
शब्दा अर्थ थकेलो,
स्वयं प्रकाशी आदि अविनाशी,
ज्ञाता ज्ञान नगेेलो,
साधो भाई अपणी आप लखेलो।।

देश काल वस्तु गुण नाही,
ना कोई संग अकेलो,
सत परवाण लागे न कोई,
ना समझे ना गेलो,
साधो भाई अपणी आप लखेलो।।

सूक्ष्म गति अवांचक पद है,
ना न्यारा ना भेलो,
अचलराम निज केवल चेतन,
अगम निगम देवे हेलो,
साधो भाई अपणी आप लखेलो।।

साधो भाई अपणी आप लखेलो,
अपणी बात आप ही जाणे,
ना घटे ना बधेलो,
ना कोई बंध मुक्त का फंदा,
ना मिल्यो बिसरेलो,
पांच क्लेश लेश नी जिसमें,
ना गुरु ना चेलो,
साधो भाई अपणी आप लखेलो।।



स्वामी अचलराम जी की वाणी_साधो भाई अपनी आप लखे लो | श्री मोहन महाराज पदमपुर | Mohan maharaj padampur

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Saroj Jangir Author Admin - Saroj Jangir

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