पुरी में जाने का ये मौका अब आया है भजन
पुरी में जाने का ये मौका अब आया है भजन Puri Me Jane Ka Mouka Bhajan
पुरी में जाने का ये मौका अब आया है,
जगन्नाथ ने मुझे अब धाम पे बुलाया है॥
अरे पुरी की गलियों में हम घूमेंगे नाचेंगे,
वहाँ के लोगों से थोड़ा प्रसाद माँगेंगे। ।।
दया ये उनकी है, ये ख्याल मुझे आया है,
पुरी में जाने का ये मौका अब आया है
जगन्नाथ ने मुझे अब धाम पे बुलाया है॥
हवा में घुली हुई वो खुशबू निराली है। ।।
फूलों की देखो ज़रा खिली ये डाली है,
माता-पिता का प्यार मैं प्रभु से पाया है॥
पुरी में जाने का ये मौका अब आया है
जगन्नाथ ने मुझे अब धाम पे बुलाया है॥ ।।
गज़ब हैं वो यादें और गज़ब हैं ये बातें,
दिन भी बीत गए और बीत गई रातें।
लकी दीवाने का अब मन भर आया है॥
पुरी में जाने का ये मौका अब आया है ।।
जगन्नाथ ने मुझे अब धाम पे बुलाया है॥
जगन्नाथ ने मुझे अब धाम पे बुलाया है॥
अरे पुरी की गलियों में हम घूमेंगे नाचेंगे,
वहाँ के लोगों से थोड़ा प्रसाद माँगेंगे। ।।
दया ये उनकी है, ये ख्याल मुझे आया है,
पुरी में जाने का ये मौका अब आया है
जगन्नाथ ने मुझे अब धाम पे बुलाया है॥
हवा में घुली हुई वो खुशबू निराली है। ।।
फूलों की देखो ज़रा खिली ये डाली है,
माता-पिता का प्यार मैं प्रभु से पाया है॥
पुरी में जाने का ये मौका अब आया है
जगन्नाथ ने मुझे अब धाम पे बुलाया है॥ ।।
गज़ब हैं वो यादें और गज़ब हैं ये बातें,
दिन भी बीत गए और बीत गई रातें।
लकी दीवाने का अब मन भर आया है॥
पुरी में जाने का ये मौका अब आया है ।।
जगन्नाथ ने मुझे अब धाम पे बुलाया है॥
श्री जगन्नाथ धाम रथ यात्रा स्पेशल भजन - जरूर सुने यह भजन | गोवत्स राधाकृष्णजी महाराज
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पुरी की गलियाँ जीवन्त, रंग-बिरंगी और भक्तों की उमंग से परिपूर्ण दिखती हैं; वहां घूमना न सिर्फ शरीर की यात्रा है बल्कि आत्मा का आलिंगन भी बन जाता है। लोग और उनके रूप—हँसी, प्रसाद बाँटने की सरलता, चेहरे पर अटूट श्रद्धा—सब भीतर एक नरम‑सा स्पर्श छोड़ जाते हैं। प्रसाद मांगने की उम्मीद में भी एक सुंदर विनम्रता है; वह अनुरोध केवल भोजन के लिए नहीं, बल्कि आशीर्वाद और उस साझा विश्वास का संकेत है जो सबको जोड़ता है।
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पुरी का आमंत्रण एक आंतरिक उत्साह और अनुपम श्रद्धा का संचार करता है। इसे सुनते ही मन में तीव्र तरंग उठती है—एक यात्रा की उमंग, भीड़‑भाड़ की गलियों में मिलन की प्रीत, और देवालय की पवित्रता से सीधे जुड़ने का आनंद। धाम की ओर जाने की खबर सीने में दीप जला देती है; हर साँस उत्सव की महक से भर उठती है और चलने का हर कदम भक्ति की ओर बढ़ता है।
पुरी की गलियाँ जीवन्त, रंग-बिरंगी और भक्तों की उमंग से परिपूर्ण दिखती हैं; वहां घूमना न सिर्फ शरीर की यात्रा है बल्कि आत्मा का आलिंगन भी बन जाता है। लोग और उनके रूप—हँसी, प्रसाद बाँटने की सरलता, चेहरे पर अटूट श्रद्धा—सब भीतर एक नरम‑सा स्पर्श छोड़ जाते हैं। प्रसाद मांगने की उम्मीद में भी एक सुंदर विनम्रता है; वह अनुरोध केवल भोजन के लिए नहीं, बल्कि आशीर्वाद और उस साझा विश्वास का संकेत है जो सबको जोड़ता है।
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Author - Saroj Jangir
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