तेरे होते क्यों दादी मैं हार जाती हूँ भजन
(मुखड़ा)
हर बार मैं खुद को,
लाचार पाती हूँ,
तेरे होते क्यों, दादी,
मैं हार जाती हूँ,
तेरे होते क्यों, दादी,
मैं हार जाती हूँ।।
(अंतरा)
हर कदम पे क्या यूँ ही,
मैं ठोकर खाऊँगी,
माँ, इतना कह दे, क्या,
मैं जीत ना पाऊँगी,
तेरी चौखट पे मैं क्या,
बेकार आती हूँ,
तेरे होते क्यों, दादी,
मैं हार जाती हूँ।।
क्यों अपनी बेटी को,
तू भूली-बिसरी है,
लाडो, अरदास लिए,
चौखट पे पसरी है,
तेरी ममता याद दिलाने,
तेरे द्वार आती हूँ,
तेरे होते क्यों, दादी,
मैं हार जाती हूँ।।
मेरा हाथ पकड़ ले माँ,
मैं इतना ही चाहूँ,
स्वाति, जीवन में फिर,
मैं हार नहीं पाऊँ,
अरमा ये हर्ष लिए,
दरबार आती हूँ,
तेरे होते क्यों, दादी,
मैं हार जाती हूँ।।
(अंतिम पुनरावृत्ति)
हर बार मैं खुद को,
लाचार पाती हूँ,
तेरे होते क्यों, दादी,
मैं हार जाती हूँ,
तेरे होते क्यों, दादी,
मैं हार जाती हूँ।।
तेरे होते क्यों दादी में हार जाती हुँ || Swati Agarwal || Rani Sati Dadi Bhajan 2021 || Sci Bhajan
Bhajan :- Tere Hote Kyu Dadi Main Haar Jati Hoon
Singer :- Swati Agarwal
Lyrics :- Vinod Agarwal ( Harsh )