रंग में होली कैसे खेलूँ री मैं साँवरिया के संग

रंग में होली कैसे खेलूँ री मैं साँवरिया के संग

रंग में होली कैसे खेलूँ री, मैं साँवरिया के संग।
रंग में होली कैसे खेलूँ री, मैं साँवरिया के संग॥

घर-घर से ब्रज बनिता आई,
लिए किशोरी संग।
लाला लिए किशोरी संग।
चन्द्र सखी हँसि यों उठ बोली,
लगा श्याम के अंग।
रंग में होली कैसे खेलूँ री, मैं साँवरिया के संग॥

अबीर उड़त, गुलाल उड़त,
उड़ते सातों रंग।
भर पिचकारी सनमुख मारी,
अँखियाँ हो गई तंग।
साड़ी सरस सभी मेरो भीजो,
भिज गयो सब अंग।
लाला, भिज गयो सब अंग।
बज मारे को कहाँ भिगौऊँ,
कारी कंबर अंग।
रंग में होली कैसे खेलूँ री, मैं साँवरिया के संग॥

चुनरी भिगोये, लहँगा भिगोये,
छूटौ किनारी रंग।
सूरदास को कहा भिगोये,
कारी कंबर अंग।
नैनन सुरमा, दाँतन मिस्सी,
रंग होत भदरंग।
मसक गुलाल मले मुख ऊपर,
बुरौ कृष्ण को संग।
रंग में होली कैसे खेलूँ री, मैं साँवरिया के संग॥

तबला बाजे, सरंगी बाजे,
अरु बाजे मृदंग।
कान्हा जी की वाँसुरी बाजे,
राधा जी के संग।
रंग में होली कैसे खेलूँ री, मैं साँवरिया के संग॥

कोरे-कोरे कलश मँगाये,
ता पर घोलो रंग।
भर पिचकारी सनमुख मारी,
चोली हो गई तंग।
खसम तुम्हारों बड़ो निखट्टू,
चलो हमारे संग।
रंग में होली कैसे खेलूँ री, मैं साँवरिया के संग॥


कैसे होरी खेलूँ रे या सांवरिया के संग | राधा कृष्ण जी महाराज | Holi Bhajan (2023)

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Saroj Jangir Author Admin - Saroj Jangir

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