मेरी मैया दे द्वारे सोणा शेर गजदा भजन
मेरी मैया दे द्वारे सोणा शेर गजदा भजन
मेरी मैया दे द्वारे सोणा शेर गजदा,
मेरी मैया दे द्वारे सोणा शेर गजदा।
मेरी मैया दे द्वारे सोणा शेर गजदा,
शेरावाली दे द्वारे सोणा शेर गजदा,
शेरावाली दे द्वारे पीला शेर गजदा।
सुनो पीले शेर की निशानी,
मत्थे ऊते टिका गल विच गांनी,
नचदा ऐ तां जदो ढोल वजदा,
शेरावाली दे द्वारे पीला शेर गजदा।
शेर मेरी मैया दा है सच्चा सेवादार है,
पहेरेदार बन के खलौता दरबार हैं,
जय माता दी रवे रटदा,
शेरावाली दे द्वारे उते शेर गजदा।
सुनो इस शेर दी है चाल निराली,
ऐह वी माँ दे दर दा बनया सवाली,
ऐदे चरणां विच ठण्डा ठण्डा जल वगदा,
शेरावाली दे द्वारे पीला शेर गजदा।
पल पल माँ दे नाल गल्लां ऐता करदा,
हर वेले माँ दी रखवाली ऐ ता करदा,
छडया सहारा ऐंने सारे जग दा,
शेरावाली दे द्वारे पीला शेर गजदा।
मेरी मैया दे द्वारे सोणा शेर गजदा।
मेरी मैया दे द्वारे सोणा शेर गजदा,
शेरावाली दे द्वारे सोणा शेर गजदा,
शेरावाली दे द्वारे पीला शेर गजदा।
सुनो पीले शेर की निशानी,
मत्थे ऊते टिका गल विच गांनी,
नचदा ऐ तां जदो ढोल वजदा,
शेरावाली दे द्वारे पीला शेर गजदा।
शेर मेरी मैया दा है सच्चा सेवादार है,
पहेरेदार बन के खलौता दरबार हैं,
जय माता दी रवे रटदा,
शेरावाली दे द्वारे उते शेर गजदा।
सुनो इस शेर दी है चाल निराली,
ऐह वी माँ दे दर दा बनया सवाली,
ऐदे चरणां विच ठण्डा ठण्डा जल वगदा,
शेरावाली दे द्वारे पीला शेर गजदा।
पल पल माँ दे नाल गल्लां ऐता करदा,
हर वेले माँ दी रखवाली ऐ ता करदा,
छडया सहारा ऐंने सारे जग दा,
शेरावाली दे द्वारे पीला शेर गजदा।
SSDN:-मेरी मईया दे द्वारे सोणा शेर गजदा | Mata Rani bhajan | Devi bhajan 2023 | Navratri special
सुंदर भजन में माँ शेरावाली (दुर्गा) और उनके वाहन, शेर, की महिमा का उद्गार झलकता है, जो भक्त के हृदय को माँ की शक्ति और उनके प्रति श्रद्धा से भर देता है। यह भाव उस सत्य को प्रकट करता है कि माँ का दर और उनका शेर दोनों ही भक्तों के लिए रक्षा और आशीर्वाद का प्रतीक हैं।माँ के द्वारे पर सोने और पीले शेर का गजना उनकी शक्ति, वैभव और भक्तों के प्रति प्रेम को दर्शाता है। यह उद्गार मन को उस अनुभूति से जोड़ता है, जैसे कोई भक्त माँ के दरबार में उनकी अलौकिक शक्ति और सौंदर्य को देखकर मंत्रमुग्ध हो जाता है। शेर का मत्थे पर टीका, गले में गहना और ढोल की थाप पर नाचना माँ के प्रति उसकी भक्ति और उत्साह को रेखांकित करता है।
शेर का माँ का सच्चा सेवादार और दरबार का पहरेदार होना उसकी निष्ठा और वफादारी को दर्शाता है। यह भाव उस सत्य को उजागर करता है कि माँ का शेर न केवल उनकी शक्ति का प्रतीक है, बल्कि भक्तों की रक्षा करने वाला भी है। जैसे कोई विद्यार्थी अपने गुरु की सेवा में हर पल तत्पर रहता है, वैसे ही शेर माँ की रखवाली और जय माता दी का रटना जारी रखता है।
शेर की निराली चाल और माँ के दर का सवाली बनना उसकी विनम्रता और भक्ति को दर्शाता है। यह उद्गार उस विश्वास को प्रकट करता है कि शेर के चरणों में बहता ठंडा जल भी माँ की कृपा का प्रतीक है। शेर का हर पल माँ के साथ गल्लां करना और सारे जग का सहारा छोड़कर उनकी सेवा में लीन रहना माँ के प्रति पूर्ण समर्पण को दर्शाता है।
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