श्री हनुमान स्तोत्र जानिये अर्थ और महत्त्व

श्री हनुमान स्तोत्र जानिये अर्थ और महत्त्व

 
श्री हनुमान स्तोत्र लिरिक्स भजन Shri Hanuman Stotra Lyrics

सर्वारिष्टनिवारकं शुभकरं,
पिङ्गाक्षमक्षापहं,
सीतान्वेषणतत्परं कपिवरं,
कोटीन्दुसूर्यप्रभम्।
 
लंकाद्वीपभयंकरं सकलदं,
सुग्रीवसम्मानितं,
देवेन्द्रादिसमस्तदेवविनुतं,
काकुत्स्थदूतं भजे।
 
ख्यातः श्रीरामदूतः पवनतनुभवः,
पिङ्गलाक्षः शिखावन्,
सीताशोकापहारी दशमुखविजयी,
लक्ष्मणप्राणदाता।
 
आनेता भेषजाद्रेर्लवणजलनिधेः,
लङ्घने दीक्षितो यः,
वीरश्रीमान् हनूमान्मम मनसि,
वसन्कार्यसिद्धुं तनोतु।
 
मनोजवं मारुततुल्यवेगं,
जितेन्द्रियं बुद्धिवतां वरिष्ठम्,
वातत्मजं वानरयूथमुख्यं,
श्रीरामदूतं शिरसा नमामि।
 
बुद्धिर्बलं यशोधैर्यं,
निर्भयत्वमरोगता,
अजाड्यं वाक्पटुत्वं च,
हनूमत्स्मरणाद्भवेत्।

हनुमान स्तोत्र || Hanumat Stotram with Lyrics || सभी समस्याओ के लिए अवश्य सुने


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पहला श्लोक: हनुमान जी के प्रथम आठ गुण

सर्वारिष्टनिवारकं शुभकरं,
विस्तृत अर्थ: 'सर्वारिष्ट' यानी सभी विपत्तियाँ, संकट और आपदाएँ। 'निवारकं' अर्थात् इन्हें पूरी तरह दूर करने वाला। 'शुभकरं' यानी सभी शुभ कार्यों को सिद्ध करने वाला, मंगलकारी। रामकथा में हनुमान जी ने लंका जाकर सीता माता को ढूँढा, रावण को संदेश दिया और संकटों से राम को मुक्त किया। इनका स्मरण सभी बाधाओं को हरता है।

पिङ्गाक्षमक्षापहं,
विस्तृत अर्थ: 'पिङ्गाक्ष' पीले या लाल नेत्रों वाले असुर का नाम। 'अक्ष' आँखों को भी कहते हैं। 'मक्षापहं' अर्थात् इनका संपूर्ण नाश करने वाला। हनुमान जी ने लंका में असुरों का वध किया, विशेषकर पिंगाक्ष जैसे राक्षसों को। यह गुण शत्रु नाश का प्रतीक है।

सीतान्वेषणतत्परं कपिवरं,
विस्तृत अर्थ: 'सीतान्वेषण' सीता माता की खोज। 'तत्परं' पूर्ण रूप से तत्पर, लगातार प्रयत्नशील। 'कपिवरं' श्रेष्ठ वानर। रामकथा में हनुमान जी ने समुद्र लाँघकर लंका में सीता को खोजा, अशोक वाटिका में मिले। यह भक्त की निष्ठा दर्शाता है।

कोटीन्दुसूर्यप्रभम्।
विस्तृत अर्थ: 'कोटी' करोड़ों, 'इन्दु' चंद्रमा, 'सूर्य' सूर्य। इन करोड़ों चंद्र-सूर्यों से भी अधिक तेजस्वी। हनुमान जी का तेज अपार है – बाल रूप में सूर्य को फल समझ खाने गए, वानर रूप में लंका जलाई। यह दिव्य प्रकाश का गुण है।

लंकाद्वीपभयंकरं सकलदं,
विस्तृत अर्थ: 'लंकाद्वीपभयंकरं' लंका द्वीप वासियों के लिए भयावह। 'सकलदं' सभी कुछ दान करने वाला, उदार। लंका में हनुमान ने राक्षसों को भस्म किया, पर सीता को चूड़ियाँ दीं। दानवीरता का प्रतीक।

सुग्रीवसम्मानितं,
विस्तृत अर्थ: 'सुग्रीव' द्वारा पूजित, सम्मानित। रामकथा में हनुमान ने सुग्रीव को राम से मिलवाया, बाद सुग्रीव ने उन्हें मंत्री बनाया। मित्रता और सम्मान का गुण।

देवेन्द्रादिसमस्तदेवविनुतं,
विस्तृत अर्थ: 'देवेन्द्र' इंद्र आदि सभी देवताओं द्वारा 'विनुतं' प्रशंसा की गई। बाल्यकाल में इंद्र ने वज्र मारा, पर ब्रह्मा ने वरदान दिया। सभी देव गाते हैं उनकी महिमा।

काकुत्स्थदूतं भजे।
विस्तृत अर्थ: 'काकुत्स्थ' इक्ष्वाकु वंश के राम। उनके 'दूत' हनुमान की भक्ति करो। राम के आदेश पर लंका गए, संदेश दिया।
दूसरा श्लोक: अगले आठ गुण

ख्यातः श्रीरामदूतः पवनतनुभवः,
विस्तृत अर्थ: 'ख्यातः' प्रसिद्ध, 'श्रीरामदूतः' श्री राम के दूत, 'पवनतनुभवः' पवन (वायु) के पुत्र। अंजना के तप से वायु पुत्र बने। राम भक्त के रूप में विख्यात।

पिङ्गलाक्षः शिखावन्,
विस्तृत अर्थ: 'पिङ्गलाक्षः' भूरा-पीला नेत्र वाला, 'शिखावन्' जटा या चोटी धारी। वानर रूप की विशेषता, तेज नेत्रों से शत्रु देखते।

सीताशोकापहारी दशमुखविजयी,
विस्तृत अर्थ: 'सीताशोकापहारी' सीता के दुःख हरने वाले, 'दशमुखविजयी' रावण विजेता। अशोक वाटिका में सीता को राम संदेश देकर शोक मिटाया।

लक्ष्मणप्राणदाता।
विस्तृत अर्थ: लक्ष्मण को प्राण दान करने वाले। संजीवनी लाकर लक्ष्मण को बचाया।

आनेता भेषजाद्रेर्लवणजलनिधेः,
विस्तृत अर्थ: 'भेषजाद्रेः' औषधि पर्वत, 'लवणजलनिधेः' लवण समुद्र को लाने वाले। रावण की माया से पहचान न चले तो पूरा पर्वत लाए।

लङ्घने दीक्षितो यः,
विस्तृत अर्थ: 'लङ्घने' समुद्र लंघन में दीक्षा (प्रवीण)। 100 योजन समुद्र एक छलाँग में लाँघा।

वीरश्रीमान् हनूमान्मम मनसि,
विस्तृत अर्थ: 'वीरश्रीमान्' वीर और प्रतापी हनुमान मेरे मन में वास करें।

वसन्कार्यसिद्धुं तनोतु।
विस्तृत अर्थ: वास करके सभी कार्य सिद्ध करें।
तीसरा श्लोक: पाँच मुख्य गुण

मनोजवं मारुततुल्यवेगं,
विस्तृत अर्थ: 'मनोजवं' मन की गति से तेज, 'मारुततुल्यवेगं' वायु समान वेग। पवन पुत्र होने से।

जितेन्द्रियं बुद्धिवतां वरिष्ठम्,
विस्तृत अर्थ: 'जितेन्द्रियं' इंद्रियों पर विजय, 'बुद्धिवतां वरिष्ठम्' बुद्धिमानों में श्रेष्ठ। लंका में बुद्धि से कार्य किया।

वातत्मजं वानरयूथमुख्यं,
विस्तृत अर्थ: 'वातात्मजं' वायु पुत्र, 'वानरयूथमुख्यं' वानर सेना प्रमुख।

श्रीरामदूतं शिरसा नमामि।
विस्तृत अर्थ: श्री राम दूत को प्रणाम।
चौथा श्लोक: स्मरण फल

बुद्धिर्बलं यशोधैर्यं,
विस्तृत अर्थ: बुद्धि, बल, यश, धैर्य।

निर्भयत्वमरोगता,
विस्तृत अर्थ: निर्भयता, निरोगता।

अजाड्यं वाक्पटुत्वं च,
विस्तृत अर्थ: अजड़ता (सतर्कता), वाणी कौशल।

हनूमत्स्मरणाद्भवेत्।
विस्तृत अर्थ: इन सबका लाभ हनुमान स्मरण से।

श्री हनुमान स्तोत्र जानिये महत्त्व

यह हनुमान स्तोत्र हनुमान जी की 16 कलाओं का सार है, जो रामचरितमानस और पुराणों से प्रेरित। पहला श्लोक विपत्ति नाश, शत्रु वध, सीता खोज, तेज, भयंकरता, सम्मान, देव प्रशंसा और राम दूत भक्ति बताता है। दूसरा श्लोक प्रसिद्धि, पवन पुत्र, नेत्र-जटा, शोक हरना, रावण विजय, लक्ष्मण उद्धार, पर्वत-सागर लाना, समुद्र लंघन, मन वास और कार्य सिद्धि का वर्णन। तीसरा श्लोक मन-वायु वेग, इंद्रिय जय, बुद्धि श्रेष्ठता, वानर प्रमुखता और प्रणाम सिखाता। चौथा श्लोक स्मरण से बुद्धि-बल-यश-धैर्य-निर्भयता-निरोगता-सतर्कता-वाक्पटुता की प्राप्ति।

इसका पाठ जप से संकट निवारण, कार्य सिद्धि, शारीरिक-मानसिक बल मिलता। राम भक्तों के लिए विशेष, हनुमान जी मन में बसते हैं। मंगलवार-सोमवार व्रत में उपयोगी, आयुर्वेदिक दृष्टि से निरोगता देता। भक्ति भाव से पढ़ें तो जीवन शुभ। 
 
Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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