तेरा सिंहासन क्यों हिल रहा है

तेरा सिंहासन क्यों हिल रहा है

 
तेरा सिंहासन क्यों हिल रहा है

तेरा सिंहासन क्यों हिल रहा है,
क्या कोई अर्जी लगा रहा है,
क्यूँ गीली चौखट ये लग रही है,
क्या कोई आँसू बहा रहा है।।

क्यों आँखें तेरी छलक रही है,
क्या भाव में कोई डूबा रहा है,
क्या कोई आँसू बहा रहा है।।

किस बात पे पलकें बंद कर ली,
क्या कोई दिल में समा रहा है,
क्या कोई आँसू बहा रहा है।।

सारे जगत को जिताने वाली,
क्या कोई तुमको हरा रहा है,
क्या कोई आँसू बहा रहा है।।

जो भा सका ना मात जग को,
वो श्याम तुमको क्यों भा रहा है,
क्या कोई आँसू बहा रहा है।।

तेरा सिंहासन क्यों हिल रहा है,
क्या कोई अर्जी लगा रहा है,
क्यूँ गीली चौखट ये लग रही है,
क्या कोई आँसू बहा रहा है।।



तेरा सिंहासन क्यों हिल रहा है | Tera Singhasan Kyu Hil Rha Hai | Shubham Rupam

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Saroj Jangir Author Admin - Saroj Jangir

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