गोवर्धन परिक्रमा लगाई मैंने रात कृष्णा भजन
गोवर्धन परिक्रमा लगाई मैंने रात कृष्णा भजन
मेरा तनक पकड़ ले हाथ, हो हाथ,
सीढ़िन पै चढ़ाए ले बनवारी।।
मेरे पैरों में छाले पड़े हुए,
परिक्रमा लगाई मैंने रातों-रात,
सीढ़िन पै चढ़ाए ले बनवारी,
मेरा तनक पकड़ ले हाथ, हो हाथ,
सीढ़िन पै चढ़ाए ले बनवारी।।
मेरे हाथ ब्रज के थके हुए,
मैंने दान किया सारी रात,
सीढ़िन पै चढ़ाए ले बनवारी,
मेरा तनक पकड़ ले हाथ, हो हाथ,
सीढ़िन पै चढ़ाए ले बनवारी।।
मेरी जीभ ब्रज की थकी हुई,
मैंने भजन सुनाए सारी रात,
सीढ़िन पै चढ़ाए ले बनवारी,
मेरा तनक पकड़ ले हाथ, हो हाथ,
सीढ़िन पै चढ़ाए ले बनवारी।।
मेरे कान ब्रज के थके हुए,
मैंने भजन सुने सारी रात,
सीढ़िन पै चढ़ाए ले बनवारी,
मेरा तनक पकड़ ले हाथ, हो हाथ,
सीढ़िन पै चढ़ाए ले बनवारी।।
मेरे नैन ब्रज के थके हुए,
मैंने दर्शन किए सारी रात,
सीढ़िन पै चढ़ाए ले बनवारी,
मेरा तनक पकड़ ले हाथ, हो हाथ,
सीढ़िन पै चढ़ाए ले बनवारी।।
सीढ़िन पै चढ़ाए ले बनवारी।।
मेरे पैरों में छाले पड़े हुए,
परिक्रमा लगाई मैंने रातों-रात,
सीढ़िन पै चढ़ाए ले बनवारी,
मेरा तनक पकड़ ले हाथ, हो हाथ,
सीढ़िन पै चढ़ाए ले बनवारी।।
मेरे हाथ ब्रज के थके हुए,
मैंने दान किया सारी रात,
सीढ़िन पै चढ़ाए ले बनवारी,
मेरा तनक पकड़ ले हाथ, हो हाथ,
सीढ़िन पै चढ़ाए ले बनवारी।।
मेरी जीभ ब्रज की थकी हुई,
मैंने भजन सुनाए सारी रात,
सीढ़िन पै चढ़ाए ले बनवारी,
मेरा तनक पकड़ ले हाथ, हो हाथ,
सीढ़िन पै चढ़ाए ले बनवारी।।
मेरे कान ब्रज के थके हुए,
मैंने भजन सुने सारी रात,
सीढ़िन पै चढ़ाए ले बनवारी,
मेरा तनक पकड़ ले हाथ, हो हाथ,
सीढ़िन पै चढ़ाए ले बनवारी।।
मेरे नैन ब्रज के थके हुए,
मैंने दर्शन किए सारी रात,
सीढ़िन पै चढ़ाए ले बनवारी,
मेरा तनक पकड़ ले हाथ, हो हाथ,
सीढ़िन पै चढ़ाए ले बनवारी।।
।।GOVARDHAN PARIKRAM LAGAYI MENE RAT।। गोवर्धन परिक्रमा लगाई मैंने रात।। #govardhan #govardhanpuja
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प्रभु के प्रति सच्ची भक्ति में थकान का कोई महत्व नहीं होता, क्योंकि प्रेम से किया गया प्रत्येक प्रयास आत्मा को उनके और अधिक निकट ले जाता है। जब मन श्रद्धा से भरकर उनके धाम की ओर बढ़ता है, तब शरीर की पीड़ा भी भक्ति के आनंद में विलीन हो जाती है। परिक्रमा, भजन, सेवा और दर्शन केवल धार्मिक कर्म नहीं, बल्कि प्रभु के प्रति अटूट प्रेम और पूर्ण समर्पण की अभिव्यक्ति हैं। जीवन की यात्रा में अनेक बार ऐसे क्षण आते हैं जब मन स्वयं को असहाय अनुभव करता है, तब केवल यही विश्वास संबल बनता है कि प्रभु अपने भक्त का हाथ कभी नहीं छोड़ते। उनका स्नेह हर कठिन राह को सरल बना देता है और हर डगमगाते कदम को नई शक्ति प्रदान करता है। उनके चरणों में समर्पित हृदय को संसार की कोई भी बाधा विचलित नहीं कर सकती। यही प्रार्थना रहती है कि जीवन की हर सीढ़ी पर उनका स्नेहिल हाथ साथ बना रहे, ताकि प्रत्येक कदम भक्ति, विश्वास और प्रेम के प्रकाश में आगे बढ़ता रहे। जय श्री बाँके बिहारी लाल की!
SONG : GOVARDHAN PARIKRAM LAGAYI MENE RAT
SINGER : SUMAN SHARMA
SINGER : SUMAN SHARMA
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Author - Saroj Jangir
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