सैया संग नहीं है गुजारा, बलम आवारा निकल गये रे, सैया संग नहीं है गुजारा, बलम आवारा निकल गये रे।
सुंदर सुरतिया पे पापा लुभाये, नहीं देखा घर और घराना, बलम आवारा निकल गये रे, सैया संग नहीं है गुजारा, बलम आवारा निकल गये रे।
बातें करें राजा लाखों अरबों की, नहीं है अठन्नी का सहारा, बलम आवारा निकल गये रे, सैया संग नहीं है गुजारा, बलम आवारा निकल गये रे।
अपने को समझे राजा डिप्टी कलेक्टर, पढ़े लिखे हैं गवांरा, बलम आवारा निकल गये रे, सैया संग नहीं है गुजारा, बलम आवारा निकल गये रे।
खेती किसानी उनके मन ही ना भावे, दिन भर घूमे गलियारा, बलम आवारा निकल गये रे, सैया संग नहीं है गुजारा, बलम आवारा निकल गये रे।
एक पिता को अपनी बेटी के लिए वर देखते समय न केवल लड़के का स्वभाव और संस्कार देखने चाहिए बल्कि उसका परिवार और घर का माहौल भी समझना बहुत ही जरूरी है। परिवार में आपसी प्रेम, सम्मान और सामंजस्य बेटी के सुखी जीवन के लिए बहुत आवश्यक होते हैं। यदि ससुराल का वातावरण सकारात्मक और सहयोगी होगा तो बेटी को जीवन में संघर्ष नहीं होगा। अच्छे संस्कारों वाले परिवार में बेटी को आदर और स्नेह मिलता है जिससे दांपत्य जीवन सुखमय होता है। इसलिए वर चयन में केवल व्यक्ति ही नहीं उसके परिवार की सोच और संस्कार भी देखने चाहिए।
विवाह गीत | सैया संग नहीं है गुजारा, बलम आवारा निकल गए रे | Shadi Vivah Geet (Singer - Komal Gouri)
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