पचरंग नेजा धारी पीर जी आप चढ़ो असवारी

पचरंग नेजा धारी पीर जी आप चढ़ो असवारी

(मुखड़ा)
केसरियो बागों बणियो,
तूरे तार हजार,
बींद बणिया है रामदेव,
रामा ही राजकुमार।

पचरंग नेजा धारी पीर जी,
आप चढ़ो असवारी।

(अंतरा 1)
सिंवरू रामदेव सन्तों रा कारण,
थाने भूलू नहीं लिगारी,
असंग जुगो रो चाकर राज रो,
चोटी काटी हैं हमारी।

(अंतरा 2)
तीन मास तुरत रो पंडित,
मन में ऐसी धारी,
पहला जाय जोधाणो चेताऊँ,
पीछे दुनियां सारी।

(अंतरा 3)
हरजी चढ़ जोधाने आयो,
निवण करे नर नारी,
शंख घड़ियालों बाजे नोपतो,
झालर री झणकारी।

(अंतरा 4)
कलश थाप ने जमो जगायो,
रुपया दो हजारी,
सवा लाख रो थेबो लागो,
धन लेवण री धारी।

(अंतरा 5)
हाकम हवलदार नौकर राज रा,
चुगलिखोर खाड़ी सारी,
एक धुताड़ो एसो आवियो,
ज्याने ठग लिदी दुनिया सारी।

(अंतरा 6)
केवे हाकम सुण ले हरजी,
सुण ले बात हमारी,
जोधाणे रो राजा बंका कहिजे,
म्हारो हाकम नाम हजारी।

(अंतरा 7)
केवे हाकम सुण ले हरजी,
सुण ले बात हमारी,
परचो देवे तो लोक पतीजे,
नितर होवे खरारी।

(अंतरा 8)
हरजी ने लेके दियो जेल में,
कियो जाबतो भारी,
दिन उगे थारी पड़े पारखा,
पछे कने करेला यारी।

(अंतरा 9)
सतयुग में सिरियादे सिंवरे,
अग्नि में बच्चा उबारी,
खम्भ फाड़ हिरणाकुश मारियो,
नख से देंत विडारी।

(अंतरा 10)
त्रेता में रावण री लारा,
भार चढ़िया सीता री,
रावण मार लंका ने तोड़ी,
पाज बांधी पत्थरा री।

(अंतरा 11)
द्वापर में केरवो ने दलिया,
पांडु पांच उबारी,
राणी द्रोपदा रो चीर पूरियों,
डाल पाकी थी आम्बा री।

(अंतरा 12)
गज और ग्रह लड़े जल भीतर,
लड़त लड़त गज हारी,
गरुड़ छोड़ पैदल होय धाया,
थे गज को लियो उबारी।

(अंतरा 13)
रूपादे जमा में माले जद,
रावल किदी सवारी,
लेय खड़ग मारण ने धाया,
थे थाली भरदी फूला री।

(अंतरा 14)
कानड़ा फूटा पाँव थोरा टूटा,
हेमर खोड़ो हंजारी,
के जायने थे पोडिया पियाल,
में आईं है मौत हमारी।

(अंतरा 15)
कलाहीन कलजुग में कायम,
डरिया राज सू भारी,
के दुःखे आंख मौंड़ा मोचे में,
शर्म छोड़ दी सारी।

(अंतरा 16)
पल पल आव घटे पंडित री,
जोउं वाट रुणेचे री,
धूप खेयोडो गयो धूड़ में,
थू लागो पलीता री लारी।

(अंतरा 17)
आयो नहीं अबे कद आसी,
कर में झेली कटारी,
मरने रा तो बाजा बाजे,
तोयन होवे पीरा री।

(अंतरा 18)
ले कटारी मेलू कालजे,
जोर करू अंत भारी,
पेट फोड़ मोरो में निकले,
सुधरेला मौत हमारी।

(अंतरा 19)
पीरजी आय ने पकड़ी कटारी,
साम्भल पीरो रा पुजारी,
भीड़ पड़या भक्तों रे भेळो,
मैं आण अजमल री धारी।

(अंतरा 20)
पीरजी जाय महल में पूगा,
हेमर हीच करारी,
धूजी धरण थांबा थरहरिया,
हाकम ली हैं बलिहारी।

(अंतरा 21)
केवे हाकम सुणो पीरजी,
सुण लो बात हमारी,
हमके अवसर छोड़ो जीवतो,
मु आयो शरण तुम्हारी।

(अंतरा 22)
केवे हरजी सुण लो हाकम,
सुण लो बात हमारी,
तीन दिनों का तनक तमाशा,
कोड निकलेला भारी।

(अंतरा 23)
पीर ने प्रसाद पंडित ने पोशागा,
देऊं राज दरबारी,
देवल कराऊं थारी ढाणी में,
दीखतो उठे पूजे नर नारी।

(अंतरा 24)
अनड़ पहाड़ पीरा कीना पादरा,
नमिया नर अहंकारी,
हर शरणे भाटी हरजी बोलिया,
चरण कमल बलिहारी।

(मुखड़ा पुनरावृत्ति)
पचरंग नेजा धारी पीर जी,
आप चढ़ो असवारी,
पिचरंग नेजा धारी गिरधर,
लाल चढ़ो असवारी।


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