केवट ने कहा रघुराई से उतराई ना लूंगा भजन
केवट ने कहा रघुराई से उतराई ना लूंगा भजन
केवट ने कहा रघुराई से,
उतराई ना लूंगा हे भगवन्।
उतराई ना लूंगा हे भगवन्।
केवट ने कहा रघुराई से,
उतराई ना लूंगा हे भगवन्॥
मैं नदी-नाल का सेवक हूँ,
तुम भवसागर के स्वामी हो।
मैं यहाँ पे पार लगाता हूँ,
तुम वहाँ पे पार लगा देना॥
लाखों को पार लगाये हो,
मुझको भी पार लगा देना।
मैं यहाँ वहाँ पार लगाता हूँ,
तुम वहाँ वहाँ पार लगा देना॥
तूने अहिल्या को पार लगाया है,
मुझको भी पार लगा देना।
मैं यहाँ पे पार लगाता हूँ,
तुम वहाँ पे पार लगा देना॥
केवट ने कहा रघुराई से,
उतराई ना लूंगा हे भगवन्॥
उतराई ना लूंगा हे भगवन्।
उतराई ना लूंगा हे भगवन्।
केवट ने कहा रघुराई से,
उतराई ना लूंगा हे भगवन्॥
मैं नदी-नाल का सेवक हूँ,
तुम भवसागर के स्वामी हो।
मैं यहाँ पे पार लगाता हूँ,
तुम वहाँ पे पार लगा देना॥
लाखों को पार लगाये हो,
मुझको भी पार लगा देना।
मैं यहाँ वहाँ पार लगाता हूँ,
तुम वहाँ वहाँ पार लगा देना॥
तूने अहिल्या को पार लगाया है,
मुझको भी पार लगा देना।
मैं यहाँ पे पार लगाता हूँ,
तुम वहाँ पे पार लगा देना॥
केवट ने कहा रघुराई से,
उतराई ना लूंगा हे भगवन्॥
Kewat Ne Kaha Raghurayi Se Bhajan-केवट ने कहा रघुराई से | केवट संवाद | प्रकाश गाँधी | New Ram Bhajan 2023 | Kevat Samvad | Ram Bhajan
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Song : Kevat Ne Kaha Raghurai Se
Singer : Prakash Gandhi
Music : Gandhi Brothers (Prakash-Subhash Gandhi)
Mix & Master :- GBR Studio (9672222053)
Lyrics : Traditional
Music Label : Power Music Company
Category :Bhajan
Singer : Prakash Gandhi
Music : Gandhi Brothers (Prakash-Subhash Gandhi)
Mix & Master :- GBR Studio (9672222053)
Lyrics : Traditional
Music Label : Power Music Company
Category :Bhajan
केवट का प्रेम और निश्छल भक्ति प्रभु के प्रति अटूट विश्वास का प्रतीक है। वह नदी का सेवक होकर प्रभु को पार लगाता है, पर उतराई नहीं माँगता, क्योंकि उसे यकीन है कि भवसागर का स्वामी उसे भी तार देगा। जैसे अहिल्या को प्रभु ने मुक्ति दी, वैसे ही केवट अपनी साधारण सेवा के बदले केवल प्रभु की कृपा चाहता है। यह भाव सिखाता है कि सच्ची भक्ति में कोई लेन-देन नहीं, केवल समर्पण और विश्वास है। प्रभु का प्रेम इतना विशाल है कि वह हर उस भक्त को पार लगाता है, जो निष्कपट मन से उसकी शरण लेता है। केवट की यह पुकार हर जीव को प्रेरित करती है कि प्रभु के चरणों में सब कुछ अर्पित कर दो, वही जीवन का सच्चा तारणहार है।
केवट का श्रीराम के प्रति समर्पण ऐसा है, जैसे कोई दीया अपने प्रकाश से अंधेरे को मिटा दे। वह नदी का सेवक है, जो नाव चलाकर दूसरों को पार लगाता है, पर उसका मन जानता है कि सच्चा पार श्रीराम ही कराते हैं, जो भवसागर के स्वामी हैं। वह कोई भेंट नहीं माँगता, बस प्रभु की कृपा से अपनी मुक्ति चाहता है, जैसे कोई प्यासा सागर की गहराई में पानी खोजे। अहिल्या को तारने वाले श्रीराम से वह यही प्रार्थना करता है कि जैसे दूसरों को पार लगाया, उसे भी भवसागर से पार कर दें। यह भक्ति का भाव है, जो निस्वार्थ सेवा में बसता है और प्रभु के चरणों में शांति पाता है, जैसे कोई नदी अंत में समंदर से मिल जाए।
केवट वह निषादराज था, जिसने भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण को अपनी नाव से गंगा नदी पार कराई थी, जब वे वनवास के लिए अयोध्या से प्रस्थान कर रहे थे। रामायण में केवट का चरित्र भक्ति, नम्रता और निस्वार्थ सेवा का प्रतीक है। जब श्रीराम ने उनसे नदी पार कराने का अनुरोध किया, तो केवट ने पहले विनम्रतापूर्वक उनके चरण धोए, यह कहते हुए कि उनकी नाव पवित्र हो जाएगी। सच्चा धर्म वही है, जो निःस्वार्थ भाव से दूसरों की सेवा में समर्पित हो। केवट का जीवन प्रेम और श्रद्धा का प्रतीक है।
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Author - Saroj Jangir
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