काशी वाला जीमबा चालो भजन

काशी वाला जीमबा चालो भजन

(मुखड़ा)
काशी वाला जीमबा चालो,
आज कबीर घर नुतो जी,
भाव प्रसादी सब ही पावो,
कोई मत रिज्यो भुखो वो जी।।

(अंतरा)
घर घर सगरी नुतो देवे,
यो नहीं मसकरो जुठो जी,
सब पकवान का भोग लागेला,
कोई मत रिज्यो भुखो वो जी।।

सातो पुण्य मचा दियो हलो,
यो मच गयो गुथम गुथो जी,
कबीरो देख्यो आपत आई,
जाय जंगल में सुतो जी।।

सकल सृष्टि के मालिक दाता,
मारे थारो बलबुतो जी,
एक बिद्द यो जासी थारो,
दुजो काशी के जुतो वो जी।।

बण बिनजारो आयो सांवरो,
काम कीयो सरुपो जी,
मनख जीमाया पशु धपाया,
किड़ी कागलो कुतो वो जी।।

काशी वाला जीमबा चालो,
आज कबीर घर नुतो जी,
भाव प्रसादी सब ही पावो,
कोई मत रिज्यो भुखो वो जी।।


ऐसे भजन बहुत कम सुनने को मीलते है ~ काशी वाला जींबा चालो आज कबीर घर नुतो ~ kaber bhajan कबीर भजन

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काशी के कबीर का घर भक्ति और प्रेम का वह ठौर है, जहाँ हर जीव को प्रभु के प्रसाद का आनंद मिलता है। वहाँ कोई भूखा नहीं रहता, क्योंकि प्रभु का भोग और भाव की प्रसादी हर हृदय को तृप्त करती है। जैसे कबीर सात पुण्य मचाकर भी सांसारिक माया को झूठा देख जंगल में शांति खोजते हैं, वैसे ही सच्चा सुख केवल प्रभु की भक्ति में है। सृष्टि का मालिक अपनी कृपा से मनुष्य, पशु, और यहाँ तक कि कीट-पतंग को भी पोषित करता है। काशी का वह बणिक बनवारी साँवरिया हर प्राणी के कर्मों को सुंदर बनाता है। यह भक्ति का भाव सिखाता है कि प्रभु के दर पर सभी समान हैं, और उनकी शरण में जाकर मन को सच्ची शांति और संतुष्टि मिलती है।
 
♪ Song ~  kasi vala jimba chalo
♪ Singer ~ Dev Sharma.Aama
♪ Author ~ kabier das ji
♪ Album ~ Rajsthani bhajan
♪ Category ~ sawriya sath bhajan
 
Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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