गोविन्द गुण गायो नहीं तूने क्या कमायो बावरे भजन

गोविन्द गुण गायो नहीं  तूने क्या कमायो बावरे भजन

गोविन्द गुण गायो नहीं
तूने क्या कमायो बावरे
गोविन्द गुण गायो नहीं
तूने क्या कमायो बावरे
माया जाल में उलझा,
हीरो सो जनम गवायो,
तूने क्या कमायो बावरे 
गोविन्द गुण गायो नहीं
तूने क्या कमायो बावरे

अमृत हरी रस छोड़ा,
माया खूब तूने कमाई,
अंत तेरे खाली हाथ रे,
तूने क्या कमायो बावरे 
गोविन्द गुण गायो नहीं
तूने क्या कमायो बावरे

गोविन्द गुण गायो नहीं
तूने क्या कमायो बावरे
गोविन्द गुण गायो नहीं
तूने क्या कमायो बावरे
माया जाल में उलझा,
हीरो सो जनम गवायो,
तूने क्या कमायो बावरे 
गोविन्द गुण गायो नहीं
तूने क्या कमायो बावरे

तोड़ जग बंधन बन्दे,
गुण गोविन्द के गाय,
वो अनंत का स्वामी, 
सकल जग महिमा गाय,
समय बीत्यो जाय रे,
काहे समय गवाये बावरे
तूने क्या कमायो बावरे,
गोविन्द गुण गायो नहीं
तूने क्या कमायो बावरे
गोविन्द गुण गायो नहीं
तूने क्या कमायो बावरे
माया जाल में उलझा,
हीरो सो जनम गवायो,
तूने क्या कमायो बावरे
गोविन्द गुण गायो नहीं
तूने क्या कमायो बावरे


Govind Gun Gayo Nahi Tune Kya Kamayo Baware Kabir Bhajan

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Lyrics and Composition : Saroj Jangir 
 
Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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