भजना मे जावा कोनी दे राजस्थानी भजन
भजना मे जावा कोनी दे,
सतसंग मे जावा को नी दे,
भजना मे जावा कोनी दे,
सतसंग मे जावा को नी दे,
जम्बुला मे जावा को नी दे,
अछि रे परनाई रावल,
देस में हो म्हारा राज।।
क्यु नहीं कि नी पारस,
पीपली हो म्हारा राज,
रैति वन रे माए,
आवता साधुङा छाया,
बेठता हो म्हारा राज,
म्हारो अमर वेतो नाम,
अछि परनाई रावल,
देस में हो म्हारा राज।।
क्यु नहीं कि नि कुआँ,
बावड़ी हो म्हारा राज,
रेति मारग रे माए,
आवता साधुडा पानी,
पिवता हो म्हारा राज,
म्हारो अमर वेतो नाम,
अछि परनाई रावल,
देस में हो म्हारा राज।।
क्यु नहीं कि नी वनरी,
रोजङी हो म्हारा राज,
रेति वन रे माए,
आवता साधुङा लेती,
वारणा हो म्हारा राज,
म्हारो अमर वेतो नाम,
अछि परनाई रावल,
देस में हो म्हारा राज।।
हाथ जोड़ी ने रूपा बोलिया,
संसारो अमरापुर मे वास,
किरपा भक्ता पर संता राखीजो,
थारो जनम जनम गुण गाये,
अछि परनाई रावल,
देस में हो म्हारा राज।।
भजना मे जावा कोनी दे,
सतसंग मे जावा को नी दे,
जम्बुला मे जावा को नी दे,
अछि रे परनाई रावल,
देस में हो म्हारा राज।।
सतसंग मे जावा को नी दे,
भजना मे जावा कोनी दे,
सतसंग मे जावा को नी दे,
जम्बुला मे जावा को नी दे,
अछि रे परनाई रावल,
देस में हो म्हारा राज।।
क्यु नहीं कि नी पारस,
पीपली हो म्हारा राज,
रैति वन रे माए,
आवता साधुङा छाया,
बेठता हो म्हारा राज,
म्हारो अमर वेतो नाम,
अछि परनाई रावल,
देस में हो म्हारा राज।।
क्यु नहीं कि नि कुआँ,
बावड़ी हो म्हारा राज,
रेति मारग रे माए,
आवता साधुडा पानी,
पिवता हो म्हारा राज,
म्हारो अमर वेतो नाम,
अछि परनाई रावल,
देस में हो म्हारा राज।।
क्यु नहीं कि नी वनरी,
रोजङी हो म्हारा राज,
रेति वन रे माए,
आवता साधुङा लेती,
वारणा हो म्हारा राज,
म्हारो अमर वेतो नाम,
अछि परनाई रावल,
देस में हो म्हारा राज।।
हाथ जोड़ी ने रूपा बोलिया,
संसारो अमरापुर मे वास,
किरपा भक्ता पर संता राखीजो,
थारो जनम जनम गुण गाये,
अछि परनाई रावल,
देस में हो म्हारा राज।।
भजना मे जावा कोनी दे,
सतसंग मे जावा को नी दे,
जम्बुला मे जावा को नी दे,
अछि रे परनाई रावल,
देस में हो म्हारा राज।।
भजना मैं जावा कोणी दे - रानी रूपादे भजन | प्रकाश माली नए अंदाज में | Superhit Rajasthani Bhajan
Bhajana Me Jaava Konee De,
Satasang Me Jaava Ko Nee De,
Bhajana Me Jaava Konee De,
Satasang Me Jaava Ko Nee De,
Jambula Me Jaava Ko Nee De,
Achhi Re Paranaee Raaval,
Des Mein Ho Mhaara Raaj..
Kyu Nahin Ki Nee Paaras,
Peepalee Ho Mhaara Raaj,
Raiti Van Re Mae,
Satasang Me Jaava Ko Nee De,
Bhajana Me Jaava Konee De,
Satasang Me Jaava Ko Nee De,
Jambula Me Jaava Ko Nee De,
Achhi Re Paranaee Raaval,
Des Mein Ho Mhaara Raaj..
Kyu Nahin Ki Nee Paaras,
Peepalee Ho Mhaara Raaj,
Raiti Van Re Mae,
Song : Chourasi Ki Nind Mein - चौरासी की नींद में
Album : Bole Mera Satguru Amritwani - बोले मेरा सतगुर अमृतवाणी
Singer : Moinuddin Manchala
Music : Inder Sharma
Music Label : Madhur Geet Cassettes
Album : Bole Mera Satguru Amritwani - बोले मेरा सतगुर अमृतवाणी
Singer : Moinuddin Manchala
Music : Inder Sharma
Music Label : Madhur Geet Cassettes
भजनां में जाबा कोनी दे : मुझे भजनों में जाने ही नहीं देता है,
सत्संगत में जाने की अनुमति नहीं देता है। रानी रूपा दे जी ईश्वर से विनय
करती है की मेरा पति तो मुझे ईश्वर भक्ति से विमुख करता है।
आछी परणाई, नुगरा माल ने, ओ म्हारा राज : आपने बहुत अच्छे (आछी ) से मेरा विवाह किया है (यह व्यंग्य स्वरूप है, भाव है की मेरा विवाह आपने बहुत ही बुरी जगह किया है जहाँ पर ईश्वर के लिए कोई स्थान नहीं है ). मेरा पति तो नुगरा है।
आछी -अच्छी। परणाई-शादी की है। नुगरा-दुष्ट, माल-रावल मान (रूपादे के पति) ओ म्हारा राज-मेरे स्वामी।
क्यों नहीं कीन्ही बन री रोजड़ी, ओ म्हारा राज : मेरे स्वामी आपने मुझे वन की रोजड़ी (मृग) क्यों नहीं बनाया ? क्यों नहीं कीन्ही : आपने ऐसा क्यों नहीं किया, बन री रोजड़ी-वन की रोजड़ी (मृग/हिरण ) : आपने मुझे वन का मृग क्यों नहीं बनाया ?
चरती हरियो हरियो घास : मैं वन में रहती और हरा हरा घास खाती (चरती )
आवता साधुड़ा रा लेवती बालणा : आते जाते साधुओं की नज़र उतारती।
रहतो म्हारों जग में, अमर नाम : मेरा इस जगत में अमर नाम हो जाता।
क्यों नहीं कीनी कुआँ बावड़ी, ओ म्हारा राज : हे ईश्वर आपने मुझे कुवा और बावड़ी (तालाब) ही क्यों नहीं बना दिया ?
रहती मारगों रे माय : मैं राह के मध्य रहती। मारगों -मार्ग/राह, माय-मध्य।
आवता साधुड़ा पाणी पीवता : आते जाते साधू संत मेरा पानी पीते।
क्यों नहीं कीन्ही पारस पीपली, ओ म्हारा राज : आपने मुझे पारस पीपल ही क्यों नहीं बनाया ?
रहती बन रे माय : मैं वन में रहती।
आवता साधुड़ा छाया बैठता : आते जाते साधु संत मेरी छाया में बैठते।
हाथ जोड़ी ने रूपा बोलियां, ओ म्हारा राज : हाथ जोड़ कर रानी रूपा दे कहती है।
म्हारे साधुड़ो रो अमरापुर मे वास : मेरे साधुओं का तो स्वर्ग में वास (निवास) है।
आछी परणाई, नुगरा माल ने, ओ म्हारा राज : आपने बहुत अच्छे (आछी ) से मेरा विवाह किया है (यह व्यंग्य स्वरूप है, भाव है की मेरा विवाह आपने बहुत ही बुरी जगह किया है जहाँ पर ईश्वर के लिए कोई स्थान नहीं है ). मेरा पति तो नुगरा है।
आछी -अच्छी। परणाई-शादी की है। नुगरा-दुष्ट, माल-रावल मान (रूपादे के पति) ओ म्हारा राज-मेरे स्वामी।
क्यों नहीं कीन्ही बन री रोजड़ी, ओ म्हारा राज : मेरे स्वामी आपने मुझे वन की रोजड़ी (मृग) क्यों नहीं बनाया ? क्यों नहीं कीन्ही : आपने ऐसा क्यों नहीं किया, बन री रोजड़ी-वन की रोजड़ी (मृग/हिरण ) : आपने मुझे वन का मृग क्यों नहीं बनाया ?
चरती हरियो हरियो घास : मैं वन में रहती और हरा हरा घास खाती (चरती )
आवता साधुड़ा रा लेवती बालणा : आते जाते साधुओं की नज़र उतारती।
रहतो म्हारों जग में, अमर नाम : मेरा इस जगत में अमर नाम हो जाता।
क्यों नहीं कीनी कुआँ बावड़ी, ओ म्हारा राज : हे ईश्वर आपने मुझे कुवा और बावड़ी (तालाब) ही क्यों नहीं बना दिया ?
रहती मारगों रे माय : मैं राह के मध्य रहती। मारगों -मार्ग/राह, माय-मध्य।
आवता साधुड़ा पाणी पीवता : आते जाते साधू संत मेरा पानी पीते।
क्यों नहीं कीन्ही पारस पीपली, ओ म्हारा राज : आपने मुझे पारस पीपल ही क्यों नहीं बनाया ?
रहती बन रे माय : मैं वन में रहती।
आवता साधुड़ा छाया बैठता : आते जाते साधु संत मेरी छाया में बैठते।
हाथ जोड़ी ने रूपा बोलियां, ओ म्हारा राज : हाथ जोड़ कर रानी रूपा दे कहती है।
म्हारे साधुड़ो रो अमरापुर मे वास : मेरे साधुओं का तो स्वर्ग में वास (निवास) है।
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Author - Saroj Jangir
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