बालासा म्हारा कीर्तन में आवो जी
बालासा म्हारा कीर्तन में आवो जी
बालासा म्हारा कीर्तन में आवो जी,
एक बार थे आजावो,
म्हे धोक लगावा जी।
म्हे मन में थारी,
ज्योत जगावा जी,
भक्ति और शक्ति द्यो,
नही पल बिसरावा जी,
बालासा म्हारा कीर्तन में आवो जी,
एक बार थे आजावो,
म्हे धोक लगावा जी।
चरणा री धूळ,
इक बार पावा जी,
श्री राम के प्यारे,
भव से तार जावा जी,
बालासा म्हारा कीर्तन में आवो जी,
एक बार थे आजावो,
म्हे धोक लगावा जी।
थारे ढोल-नगाड़ा,
शंख बजावा जी,
इक बार थे आजावो,
थारी आरती गावा जी,
बालासा म्हारा कीर्तन में आवो जी,
एक बार थे आजावो,
म्हे धोक लगावा जी।
सियाराम जी से,
म्हाने मिलावो जी,
भक्ता के संग मिलकर,
नाचा और गावा जी,
बालासा म्हारा कीर्तन में आवो जी,
एक बार थे आजावो,
म्हे धोक लगावा जी।
घर-घर में थारो,
नाम जपावा जी,
म्हारे हिवड़े बस जावो,
म्हे आस लगावा जी,
बालासा म्हारा कीर्तन में आवो जी,
एक बार थे आजावो,
म्हे धोक लगावा जी।
एक बार थे आजावो,
म्हे धोक लगावा जी।
म्हे मन में थारी,
ज्योत जगावा जी,
भक्ति और शक्ति द्यो,
नही पल बिसरावा जी,
बालासा म्हारा कीर्तन में आवो जी,
एक बार थे आजावो,
म्हे धोक लगावा जी।
चरणा री धूळ,
इक बार पावा जी,
श्री राम के प्यारे,
भव से तार जावा जी,
बालासा म्हारा कीर्तन में आवो जी,
एक बार थे आजावो,
म्हे धोक लगावा जी।
थारे ढोल-नगाड़ा,
शंख बजावा जी,
इक बार थे आजावो,
थारी आरती गावा जी,
बालासा म्हारा कीर्तन में आवो जी,
एक बार थे आजावो,
म्हे धोक लगावा जी।
सियाराम जी से,
म्हाने मिलावो जी,
भक्ता के संग मिलकर,
नाचा और गावा जी,
बालासा म्हारा कीर्तन में आवो जी,
एक बार थे आजावो,
म्हे धोक लगावा जी।
घर-घर में थारो,
नाम जपावा जी,
म्हारे हिवड़े बस जावो,
म्हे आस लगावा जी,
बालासा म्हारा कीर्तन में आवो जी,
एक बार थे आजावो,
म्हे धोक लगावा जी।
बालासा म्हारा कीर्तन में आवो जी,एक बार थे आजावो,म्हे ढोक लगावा जी।। नवराज जी महाराज, राजसेवक भाई
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भक्त का हृदय प्रभु के कीर्तन में उनकी उपस्थिति की आस लगाए बैठा है। जैसे माँ बच्चे को बुलाती है, वैसे ही भक्त बालासा को कीर्तन में बुलाता है, ताकि उनके चरणों में माथा टेक सके। मन में उनकी ज्योत जगाकर, भक्ति और शक्ति की याचना करता है, कि एक पल भी उनका स्मरण न भूले।
उनके चरणों की धूल ही भवसागर से तारने वाली है। राम के प्यारे की कृपा से आत्मा मुक्ति का मार्ग पाती है। ढोल-नगाड़ों और शंख की ध्वनि के बीच उनकी आरती गाने की लालसा, भक्त के मन को उत्साह से भर देती है। सियाराम के संग मिलकर नाचना-गाना, जीवन को आनंदमय बना देता है।
हर घर में उनका नाम गूँजे, हर हृदय में वे बस जाएँ—यही भक्त की कामना है। जैसे दीया तेल की आस में जलता है, वैसे ही भक्त उनकी कृपा की आस में कीर्तन करता है। सच्चा भक्त वही, जो प्रभु के नाम में डूबकर संसार को भक्ति की नजर से देखता है।
उनके चरणों की धूल ही भवसागर से तारने वाली है। राम के प्यारे की कृपा से आत्मा मुक्ति का मार्ग पाती है। ढोल-नगाड़ों और शंख की ध्वनि के बीच उनकी आरती गाने की लालसा, भक्त के मन को उत्साह से भर देती है। सियाराम के संग मिलकर नाचना-गाना, जीवन को आनंदमय बना देता है।
हर घर में उनका नाम गूँजे, हर हृदय में वे बस जाएँ—यही भक्त की कामना है। जैसे दीया तेल की आस में जलता है, वैसे ही भक्त उनकी कृपा की आस में कीर्तन करता है। सच्चा भक्त वही, जो प्रभु के नाम में डूबकर संसार को भक्ति की नजर से देखता है।
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Author - Saroj Jangir
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