चली जी भोले की बारात है शिव भजन
चली जी भोले की बारात है शिव भजन
नंदी सवार चले, होकर तैयार चले,
प्रेत साथ चले, मेरे भोलेनाथ चले।
बना है कैसा दूल्हा, रूप है जिनका भोला,
चले हैं हिमाचल, भोलेनाथ जी।
प्यारी-सी सुहानी आई रात है,
चली जी, भोले की बारात है।
आज गौरा मां के भाग जागे,
तीनों लोकों के स्वामी दूल्हा बने हैं।
देखो, देवता सारे साथ खड़े हैं,
आज गौरा के भोले होने चले हैं।
चार संग माता जी आईं,
लक्ष्मी संग विष्णु जी आए,
शुक्र, शनिश्चर भी साथ हैं,
चली जी, भोले की बारात है।
चले औघड़दानी, नंदी सवार,
सर से बहती है गंगा की धार।
गले नाग लपटे, तन पे विष हजार,
आज खुशियां मनाए सारा संसार।
दमक-दमक डमरू बाजे,
बम बम भोला नाचे,
शनि राजा पे तेरा हाथ है,
चली जी, भोले की बारात है।
प्रेत साथ चले, मेरे भोलेनाथ चले।
बना है कैसा दूल्हा, रूप है जिनका भोला,
चले हैं हिमाचल, भोलेनाथ जी।
प्यारी-सी सुहानी आई रात है,
चली जी, भोले की बारात है।
आज गौरा मां के भाग जागे,
तीनों लोकों के स्वामी दूल्हा बने हैं।
देखो, देवता सारे साथ खड़े हैं,
आज गौरा के भोले होने चले हैं।
चार संग माता जी आईं,
लक्ष्मी संग विष्णु जी आए,
शुक्र, शनिश्चर भी साथ हैं,
चली जी, भोले की बारात है।
चले औघड़दानी, नंदी सवार,
सर से बहती है गंगा की धार।
गले नाग लपटे, तन पे विष हजार,
आज खुशियां मनाए सारा संसार।
दमक-दमक डमरू बाजे,
बम बम भोला नाचे,
शनि राजा पे तेरा हाथ है,
चली जी, भोले की बारात है।
भोले की बारात | Sunny Sharma | Shiv Bhole Baba Bhajan | Shiv Bhajan 2019 | Sonotek
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भोलेनाथ की बारात सजी है, मानो सृष्टि का हर कण उत्सव में डूबा हो। नंदी पर सवार, गंगा को मस्तक पर धरे, गले में नाग और तन पर विष की माला सजाए, वे भोले रूप में दूल्हा बने हैं। उनका सादा स्वरूप हृदय को मोह लेता है, जैसे चाँद अपनी सादगी से रात को सजाता है।
गौरा माँ के भाग्य आज खिल उठे हैं। तीनों लोकों के स्वामी उनके संग बंधन में बंधने चले हैं। देवता, लक्ष्मी-विष्णु, शुक्र-शनि—सब उनकी बारात की शोभा बढ़ा रहे हैं। डमरू की ध्वनि और भोले का नाच सृष्टि को आनंद से झुमा देता है। प्रेतों के साथ चलने वाला यह औघड़दानी हर भक्त के कष्ट हर लेता है।
यह बारात केवल विवाह की नहीं, बल्कि प्रेम और विश्वास की मिसाल है। भोले का हर रूप, हर लीला, जीवन को सिखाती है कि सादगी में ही सच्ची शक्ति है। सच्चा भक्त वही, जो भोले की इस बारात में शामिल होकर उनके प्रेम में रम जाता है।
गौरा माँ के भाग्य आज खिल उठे हैं। तीनों लोकों के स्वामी उनके संग बंधन में बंधने चले हैं। देवता, लक्ष्मी-विष्णु, शुक्र-शनि—सब उनकी बारात की शोभा बढ़ा रहे हैं। डमरू की ध्वनि और भोले का नाच सृष्टि को आनंद से झुमा देता है। प्रेतों के साथ चलने वाला यह औघड़दानी हर भक्त के कष्ट हर लेता है।
यह बारात केवल विवाह की नहीं, बल्कि प्रेम और विश्वास की मिसाल है। भोले का हर रूप, हर लीला, जीवन को सिखाती है कि सादगी में ही सच्ची शक्ति है। सच्चा भक्त वही, जो भोले की इस बारात में शामिल होकर उनके प्रेम में रम जाता है।
Singer - Sunny Sharma
Album - Bhole ki Barat
Lyrics - DK Raja
Lyrics - DK Raja
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Author - Saroj Jangir
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