जय राधा माधव जय कुंज बिहारी भजन
जय राधा माधव जय कुंज बिहारी जगजीत सिंह कृष्ण भजन
जय गोपी जन बलव गोवर्धन गिरधारी,
बनवाली गोपाला मधुसुधन बनवारी,
जय द्वारिका वासी जय बांके बिहारी,
जय राधा माधव जय कुंज बिहारी,
दामोधर गोविंदा वासुदेव बनचारी,
जय मुरलीधर श्याम जोगी राज हल्धारी,
जय राधा माधव जय कुंज बिहारी
जय जय यशोदा नंदन माधव मदन मुरारी,
घनश्याम कृष्ण मोहन जन्ताप कस्टधारी,
जय राधा माधव जय कुंज बिहारी
नरसी के सांवरिया मीरा के नगरिया,
तुसीदास के राम जय जय अवध बिहारी,
जय राधा माधव जय कुंज बिहारी,
तुका राम के विथल रन छोड़ पांडू रंगा,
सूरदास के श्याम राधा के रास बिहारी,
जय राधा माधव जय कुंज बिहारी
Yashoda Nandan, Brij Jan Ranjan
Jamuna Teer Ban Chari
Murli Manohar Karuna Sagar
Hare Krishna, Hare Krishna
Krishna Krishna, Hare Hare
Hare Rama, Hare Rama
Rama Rama, Hare Hare
भजन का भाव : राधा और कृष्ण का प्रेममय नाम हृदय में बस जाता है, जैसे वृंदावन की कुंज गलियों में मुरली की तान गूँजती है। यह भक्ति गोपियों की तरह आत्मा को माँग लेती है, जो गोवर्धन की छाया में प्रभु के चरणों में लीन हो जाती हैं। कृष्ण का हर नाम—गोपाल, मधुसूदन, द्वारकाधीश—भक्त के मन में एक नया रंग भरता है। जैसे कोई चित्रकार रंगों से कैनवास सजाता है, वैसे ही भक्त का हृदय प्रभु के गुणों से सज उठता है।
दामोदर हो या मुरलीधर, हर रूप में कृष्ण भक्तों के दुख हरते हैं। उनकी मुरली की धुन मन को योगी बना देती है, जो संसार के बंधनों से मुक्त होकर प्रभु में रम जाता है। यशोदा के लाल, मीरा के साँवरिया, तुलसी के राम—हर भक्त अपने प्रभु को अपने ही रंग में रंग लेता है। जैसे नरसी भगत ने अपनी भक्ति से प्रभु को बुलाया, वैसे ही हर भक्त का प्रेम प्रभु को अपने पास खींच लाता है।
सूरदास की आँखों में राधा-कृष्ण का रास बसता है, तुकाराम के विठ्ठल में संसार की सारी माया समा जाती है। यह भक्ति का रंग ऐसा है, जो मन को राधा-माधव की भेंट चढ़ा देता है। हर जयकारे में भक्त का जीवन प्रभु की लीला में डूब जाता है, जैसे नदी सागर में मिलकर एक हो जाती है।
जब दिल में राधा-माधव का नाम गूँजता है, तो जैसे सारी दुनिया कुंज बन जाती है—वो हरी-भरी वन-उपवन, जहाँ गोपियों की टोलियाँ नाचती हैं, गोवर्धन गिरधारी अपनी उँगली पर पहाड़ उठाए मुस्कुराते हैं। बनवारी, मधुसूदन, द्वारिका के वासी, बांके बिहारी—हर नाम में वो प्रेम की लहर है जो मन को बहा ले जाती है। दामोदर जो माँ यशोदा की गोद में बंधे थे, वासुदेव जो द्वारिका में राज करते थे, मुरलीधर जो बंसी की तान पर सबको भुला देते हैं, जोगी राज जो योगियों के भी राजा हैं, हलधारी जो गोपालन की मिसाल हैं—सब एक ही श्याम के रूप हैं, जो राधा के साथ कुंज में रास रचाते हैं।
फिर यशोदा के नंदन, माधव, मदनमोहन, मुरारी, घनश्याम, मोहन—जो जनता के कष्ट हर लेते हैं। नरसी के साँवरिया, मीरा के नगरिया, तुलसीदास के राम, अवध बिहारी, तुकाराम के विठ्ठल, पांडुरंग, सूरदास के श्याम, राधा के रास बिहारी—हर भक्त के लिए अलग-अलग नाम, अलग-अलग रूप, लेकिन प्रेम वही एक। ये नाम जपते ही लगता है जैसे राधा-कृष्ण खुद पास आ गए हों, कुंज की ठंडी हवा में उनकी मुरली की तान सुनाई दे रही हो। बस यही पुकार है कि वो रास बिहारी हमेशा मन में विराजमान रहें, हर सांस में उनका नाम बसे। आप सभी पर ईश्वर की कृपा बनी रहे। जय श्री कृष्ण जी की। जय श्री राधा जी की।
Jai Radha Madhav Mahamantra ·
Siner : Jagjit Singh
Jai Radha Madhav Jagjit Singh
जगजीत सिंह मुख्य रूप से ग़ज़ल सम्राट के नाम से प्रसिद्ध थे, लेकिन भजन गायक के रूप में भी उन्होंने अपनी मधुर और आत्मिक आवाज़ से लाखों भक्तों के दिलों को छुआ। उनकी भक्ति भरी आवाज़ में राम, कृष्ण, शिव और माँ के भजन जैसे "हे राम हे राम", "हे गोविंद हे गोपाल", "ओम नमो भगवते वासुदेवाय", "हरि बिन कौन सहाय" और "तुम ढूंढो मुझे गोपाल" जैसी रचनाएँ अत्यंत लोकप्रिय हुईं। क्लासिकल संगीत की गहरी समझ और भावपूर्ण प्रस्तुति के कारण उनके भजन सुनकर मन को गहरी शांति और भक्ति की अनुभूति होती है, जो आज भी श्रद्धालुओं के बीच अमर हैं और भक्ति संगीत की दुनिया में उनका विशेष योगदान सदैव याद किया जाता है।
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Author - Saroj Jangir
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