अहो राम गुरुवर चरण में तुम्हारे भजन

अहो राम गुरुवर चरण में तुम्हारे भजन

अहो राम गुरुवर चरण में तुम्हारे,
स्वीकारो स्वीकारो ये वंदन हमारे
अहो राम गुरुवर चरण में तुम्हारे,
स्वीकारो स्वीकारो ये वंदन हमारे,

हो संयम सुमेरु,कठिनतम क्रियाधर,
बहे दिव्य वाणी,हो जैसे सुधाकर,
प्रतिबोध पाते भविक जीव सारे,
स्वीकारो स्वीकारो ये वंदन हमारे,
अहो राम गुरुवर......

कहीं और देखा ना,अद्भुत अतिशय,
तेरा नाम लेते ही,मिटते सभी भय,
हे भगवन विराजो, हृदय में हमारे,
स्वीकारो स्वीकारो ये वंदन हमारे,
अहो राम गुरुवर...

मन की कटोरी में भावों का चंद,
समर्पण के फूलों से करते हैं पूजन,
"कपिल" दीप श्रद्धा से आरती उतारे,
स्वीकारो स्वीकारो ये वंदन हमारे,
अहो राम गुरुवर........

सुन्दर भजन में श्रीरामजी के प्रति अपार श्रद्धा, भक्ति और विनम्र समर्पण का भाव प्रकट होता है। जब भक्त उनके चरणों में अपना हृदय अर्पित करता है, तब उसकी आत्मा दिव्यता से भर जाती है। यह भजन केवल स्तुति का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और प्रभु की कृपा प्राप्त करने की गहन प्रार्थना भी है।

श्रीरामजी का नाम लेते ही समस्त भय समाप्त हो जाते हैं, क्योंकि उनकी कृपा से जीवन में स्थिरता और शांति आती है। भजन में यह भाव प्रकट होता है कि प्रभु का वंदन करने से आत्मा निर्मल होती है और भक्त को सद्मार्ग की अनुभूति होती है। जब मन श्रद्धा से भर जाता है, तब समर्पण के फूल उनके चरणों में अर्पित करने से सच्ची भक्ति का अनुभव होता है।

श्रीरामजी की दिव्यता केवल उनके बाह्य स्वरूप में नहीं, बल्कि उनके नाम के प्रभाव में भी समाहित है। जो भी सच्चे मन से उनका स्मरण करता है, वह सांसारिक बंधनों से मुक्त होकर उनकी कृपा का पात्र बनता है। भजन इसी गहन अनुभूति को प्रकट करता है कि प्रभु की आराधना से ही जीवन की सार्थकता प्राप्त होती है। जय श्रीराम! उनकी कृपा सदा बनी रहे।

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